आधार कार्ड अब जन्मतिथि का प्रमाण नहीं, इन दस्तावेजों से करें साबित
कानपुर में जिला निर्वाचन अधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने शासन के निर्देश के बाद एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इसके तहत सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देश जारी किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, शासन ने यह स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड मुख्य रूप से पहचान का एक दस्तावेज है, न कि जन्मतिथि की पुष्टि का। आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि अक्सर मूल अभिलेखों पर आधारित नहीं होती, जिस कारण इसे प्रमाणित दस्तावेज की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। यह निर्णय विशेषकर मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण अभियान के मद्देनजर लिया गया है, ताकि मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
अब जन्मतिथि को प्रमाणित करने के लिए नागरिकों को अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों का उपयोग करना होगा। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, विद्यालय में दर्ज रजिस्टर की प्रति, सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध आयु संबंधी अन्य दस्तावेज, और पैन कार्ड शामिल हैं। बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे गहनता से जांच-पड़ताल के बाद ही किसी व्यक्ति की जन्मतिथि को मतदाता सूची में दर्ज करें।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगतियों से बचना है। यह कदम चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और प्रमाणिकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी जन्मतिथि के प्रमाण के लिए इन मान्य दस्तावेजों को तैयार रखें।
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