यूपी वोटर लिस्ट: नाम पक्का करने के लिए गणना प्रपत्र जमा करें, समय सीमा का इंतजार न करें
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में तेजी लाने के उद्देश्य से जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। उन्होंने अभियान की प्रगति, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जिले में गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन का कार्य 51 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। शेष 49 प्रतिशत कार्य अगले सात दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि जो भी मतदाता गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ को वापस सौंप देगा, उसका नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज किया जाएगा, भले ही गणना प्रपत्र में वर्ष 2003 से संबंधित पूरी जानकारी न भरी गई हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआइआर (Special Intensive Revision) अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि केवल मृतक, स्थानांतरित (शिफ्टेड) और दोहराई गई प्रविष्टियों (डबल एंट्री) वाले मतदाताओं के नाम हटाना है।
मतदाताओं से अपील की गई है कि वे 4 दिसंबर की अंतिम तिथि का इंतजार न करें, क्योंकि इससे बीएलओ पर कार्यभार अत्यधिक बढ़ जाएगा। गणना प्रपत्र का वापस जमा होना अनिवार्य है, अन्यथा मतदाता सूची से नाम कट सकता है। यदि गणना प्रपत्र अधूरा भी जमा किया जाता है, तब भी मतदाता सूची में नाम शामिल कर लिया जाएगा। यदि किसी पहचान संबंधी जानकारी की आवश्यकता पड़ती है, तो नोटिस जारी होने के बाद उसे आसानी से जमा किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने यह भी सूचित किया कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को अब चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं की श्रेणी को एप में संपादित करने का अधिकार भी प्रदान कर दिया गया है। इससे यदि कोई मतदाता गणना प्रपत्र में वर्ष 2003 का विवरण दर्ज नहीं कर पाता है, तो बीएलओ बाद में विवरण उपलब्ध होने पर उसे ‘अनट्रेस/नॉट वेरीफाई’ (तीसरी श्रेणी) से हटाकर पहली श्रेणी में दर्ज कर सकेगा। इसका अर्थ है कि ऐसे मतदाता जिनका नाम वर्ष 2002-2003 की मतदाता सूची में दर्ज था, उन्हें पहली श्रेणी में रखा जाएगा।
नागरिकों की सुविधा के लिए, ‘ईसीआई नेट एप’ के माध्यम से घर बैठे गणना प्रपत्र भरकर ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इस एप पर 2003 की मतदाता सूची भी उपलब्ध है, जिससे परिवार अपने पुराने विवरण जैसे माता-पिता का नाम, भाग संख्या और बूथ संख्या आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं, जिसकी सुविधा बीएलओ के पास भी उपलब्ध है।
2003 के बाद विवाह कर दूसरे परिवार में गई महिलाओं को पंजीकरण करते समय अपने माता-पिता का नाम, 2003 की सूची में दर्ज भाग संख्या और क्रम संख्या भरना होगा। पते या अन्य संशोधनों के लिए वे फॉर्म-8 का उपयोग कर सकती हैं।
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