बिहार जीत के बाद BJP की निगाहें बंगाल पर, कांग्रेस के सामने अस्तित्व का संकट
बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की शानदार जीत के बाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब अपना अगला मोर्चा पश्चिम बंगाल की ओर कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बिहार की सफलता का सिलसिला अब बंगाल तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा, “जिस तरह गंगा बिहार से होकर बंगाल जाती है, उसी तरह बिहार की जीत भाजपा को बंगाल तक ले जाएगी।” इस बयान के साथ ही 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए बंगाल भाजपा का प्रमुख लक्ष्य बन गया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह जीत एक बड़ी निराशा लेकर आई है। बिहार में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां वह मात्र छह सीटों पर सिमट गई। इस हार ने न केवल उसके राजनीतिक कद को और कमजोर किया है, बल्कि पश्चिम बंगाल में उसकी स्थिति को भी अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
कांग्रेस के सामने बंगाल में एक दुविधा खड़ी हो गई है: वह किससे लड़े? क्या वह राज्य की शक्तिशाली नेता ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से मुकाबला करे, या फिर तेजी से उभरती हुई भाजपा से, जो कांग्रेस को पूरी तरह से हाशिए पर धकेल रही है?
कांग्रेस का पश्चिम बंगाल में लगातार पतन साफ दिखाई दे रहा है। 2011 में टीएमसी की सहयोगी के तौर पर उसने 42 सीटें जीती थीं। 2016 में वाम दलों के साथ मिलकर लड़ने पर 44 सीटें मिलीं, लेकिन जमीनी पकड़ कमजोर होने लगी। 2021 के विधानसभा चुनावों तक स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि 92 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई और उसका वोट प्रतिशत मात्र 3% रह गया।
इसके विपरीत, भाजपा ने पिछले दशक में पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ को तेजी से मजबूत किया है। 2016 में उसके पास केवल तीन सीटें थीं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में 18 सीटें जीतकर उसने सबको चौंका दिया। 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा सीधे मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी, 77 सीटें और 38% वोट शेयर के साथ। यदि यह गति जारी रहती है, तो कांग्रेस इस राज्य में मुकाबले से पूरी तरह बाहर हो सकती है।
कांग्रेस की परेशानी इस बात से और बढ़ जाती है कि ममता बनर्जी उसे कोई खास तवज्जो नहीं देना चाहतीं। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले ही उन्होंने घोषणा कर दी थी कि टीएमसी बंगाल की सभी 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी, और इंडी गठबंधन को “दिल्ली के लिए” बताया, न कि बंगाल के लिए। टीएमसी के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ के अनुसार, ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की बैठक में कहा था, “टीएमसी 2026 में दो-तिहाई बहुमत के साथ लौटेगी। हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं।” उनका रुख स्पष्ट है: बंगाल में टीएमसी ही एकमात्र ताकत है।
एक समय था जब 2016 तक कांग्रेस का प्रभाव मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में मजबूत था। इंग्लिश बाजार, चांचल, सुजापुर, बेलडांगा, कांदी और नाओदा जैसी सीटें कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थीं। लेकिन 2021 के चुनावों ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया, और कांग्रेस इन सभी क्षेत्रों में शून्य पर आ गई।
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