पुतिन की भारत यात्रा: तेल, जंग और रक्षा सौदों पर होगी पीएम मोदी से अहम बातचीत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान कच्चे तेल (क्रूड) का व्यापार एक प्रमुख एजेंडा बिंदु होगा। सूत्रों के अनुसार, रूस भारत को तेल खरीद पर विशेष छूट जारी रखने की पेशकश कर सकता है, ताकि यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रही अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा दे सके। भारत, रूस से तेल आयात करने वाले प्रमुख देशों में से एक है, जिसने मास्को के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार प्रदान किया है।
दिसंबर के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में, रूसी राष्ट्रपति द्वारा भारत को रूसी क्रूड की खरीद बढ़ाने के लिए हर संभव छूट देने की पेशकश किए जाने की उम्मीद है। कूटनीतिक और उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि रूसी पक्षकारों ने पहले ही भारतीय कंपनियों को संकेत दिया है कि वे भारत जैसे बड़े ऊर्जा खरीददार देश को खोना नहीं चाहते और पहले की तरह ही छूट जारी रख सकते हैं।
पिछले दो वर्षों में, विशेष रूप से 2023-2025 के बीच, रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी नाटकीय रूप से बढ़ी है। 2021 में जहां रूसी क्रूड भारत के कुल आयात का मात्र तीन प्रतिशत था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 37 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2024-25 वित्तीय वर्ष में रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड आपूर्तिकर्ता बन गया, जिसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत रही। अक्टूबर 2025 तक, भारत ने रूस के कुल तेल निर्यात का 38 प्रतिशत हिस्सा लिया, जो चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इस वृद्धि का मुख्य श्रेय रियायती रूसी तेल को जाता है, जिसने भारतीय रिफाइनरियों, विशेषकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को काफी आकर्षित किया है।
तेल व्यापार के अलावा, रक्षा सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी।
