चौथ मांगने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज, न्यायालय ने सुनाया फैसला
न्यायालय ने चौथ मांगने के आरोपी अजीत की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है। यह मामला थाना शिकोहबाद क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ अजीत की ओर से न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दायर की गई थी।
अभियुक्त के अधिवक्ता ने न्यायालय में दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल अजीत को केवल तंग व परेशान करने के इरादे से इस मामले में झूठा फंसाया गया है। अधिवक्ता का कहना था कि अजीत ने कोई भी अपराध नहीं किया है और वह पूर्णतः निर्दोष है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अजीत ने रिद्धि-सिद्धि एचपी पेट्रोल पंप के मैनेजर या किसी अन्य कर्मचारी से पचास हजार रुपये की चौथ मांगने का कोई कृत्य नहीं किया है, और न ही किसी प्रकार की जान से मारने की धमकी दी है।
मामले को आगे बढ़ाते हुए, सप्लीमेन्ट्री जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए अजीत के अधिवक्ता ने एक नई घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर 2025 को अजीत अपने एक मित्र का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान पूर्व विधायक हरिओम यादव और उनके पुत्र विजय प्रताप यादव ने अजीत और उसके मित्र यदुवीर के साथ मारपीट की। अधिवक्ता का आरोप है कि वादी पक्ष ने पुलिस से मिलीभगत और अपनी राजनीतिक पहुँच का इस्तेमाल करते हुए अजीत के खिलाफ यह झूठा मुकदमा दर्ज करवाया है।
हालांकि, न्यायालय ने अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को सभी दलीलों पर विचार करने के बाद निरस्त करने का निर्णय सुनाया है। इस फैसले से अजीत को फिलहाल राहत नहीं मिली है और उसे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
