कोडीन युक्त सिरप का अवैध कारोबार: FSDA अधिकारी जांच के घेरे में
कोडीन युक्त सिरप के अवैध कारोबार के तार अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के अधिकारियों तक पहुंच गए हैं। इस मामले में सहायक आयुक्तों और औषधि निरीक्षकों की संदिग्ध भूमिका की गहन जांच की तैयारी है। कानपुर में बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त सिरप के अवैध भंडारण और बिक्री पकड़े जाने के बाद, कानपुर मंडल के सहायक आयुक्त औषधि दिनेश कुमार तिवारी और कानपुर नगर की औषधि निरीक्षक रेखा सचान को पहले ही मुख्यालय से संबद्ध किया जा चुका है।
इसके बाद, हाल ही में वाराणसी में आयुक्त के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में 73.30 लाख रुपये की कोडीन युक्त सिरप जब्त की गई। इस मामले में 20 एफआईआर दर्ज की गईं और छह लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। जांच पूरी होने तक 46 दवा की दुकानों पर कोडीन युक्त सिरप और नार्कोटिक्स दवाएं बेचने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
वाराणसी के दवा बाजार से पूर्वांचल के जिलों सहित बिहार और झारखंड तक दवाओं के वैध और अवैध कारोबार के सुराग मिले हैं। इतना ही नहीं, कोडीन युक्त सिरप को बांग्लादेश तक भेजे जाने की बात भी सामने आई है। नशे के लिए इन सिरप की कई गुना अधिक दामों पर बिक्री के कारण इस कारोबार में बड़े पैमाने पर लोगों की संलिप्तता पाई गई है।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई दवा प्रतिष्ठान सिरप की बिक्री का कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर पाए। नौ फर्म बंद पाई गईं, लेकिन उनके द्वारा जारी किए गए अवैध बिलों से सिरप की बिक्री का खुलासा हुआ। कुछ ऐसी फर्म भी मिलीं जो केवल कोडीन युक्त सिरप का ही कारोबार करती थीं। एफएसडीए के अधिकारियों को इस पूरे गोरखधंधे की जानकारी न होना, उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और इसे संदिग्ध माना जा रहा है।
आयुक्त का कहना है कि कोडीन युक्त सिरप के इस अवैध कारोबार के खिलाफ जांच जारी है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह मामला औषधि प्रशासन के तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है, जिस पर अंकुश लगाना आवश्यक है।
