71 पिंक टॉयलेट संचालन निजी हाथों में, नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला
लखनऊ नगर निगम ने शहर में स्थित 71 पिंक टॉयलेटों के संचालन की जिम्मेदारी अब निजी एजेंसियों को सौंपने का निर्णय लिया है। इस कदम के पीछे नगर निगम और जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा इन सार्वजनिक शौचालयों के संचालन में आ रही गंभीर विफलताएं बताई जा रही हैं। वर्तमान में, इनमें से अधिकांश पिंक टॉयलेट या तो बंद पड़े हैं या फिर अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं, जिससे महिलाओं और अन्य नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, पिंक टॉयलेट के संचालन के लिए निजी एजेंसियों को टेंडर के माध्यम से चुना जाएगा। इन एजेंसियों को न केवल टॉयलेट के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, बल्कि उन्हें टॉयलेट के बगल में स्थित दुकानों का संचालन करने और विज्ञापन प्रदर्शित करके आय अर्जित करने का अधिकार भी दिया जाएगा। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में नगर निगम को किसी भी प्रकार का वित्तीय व्यय नहीं उठाना पड़ेगा। सारा खर्च और आय का प्रबंधन निजी एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पूर्व में नियुक्त कर्मचारी मानदेय न मिलने के कारण नौकरी छोड़ चुके हैं, वहीं कई जगहों पर बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। इस अव्यवस्था के चलते कई पिंक टॉयलेटों पर ताला लटक गया है। यहां तक कि कुछ जगहों पर नियमों का उल्लंघन भी देखा गया है, जैसे कि जानकीपुरम विस्तार में एक पिंक टॉयलेट की दुकान का संचालन पुरुषों द्वारा किया जा रहा था, जबकि नियमानुसार यह महिलाओं द्वारा किया जाना चाहिए था। कुछ मामलों में तो पिंक टॉयलेट के अंदर ही गोदाम बना लिए गए थे।
नगर आयुक्त ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम या डूडा द्वारा संचालन प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा था। इसलिए, जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर निजी संस्थाओं को इन महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन का जिम्मा सौंपा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल पिंक टॉयलेटों को सुचारू रूप से चालू रखना है, बल्कि उन्हें स्वच्छ और सुलभ बनाकर नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना भी है। यह कदम शहर में स्वच्छता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
