500 साइबर फॉरेंसिक वॉरियर्स से सीमापार हैकिंग और डीपफेक से मिलेगी निजात: UP की पहल
उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में ‘मीट माई मेंटोर’ कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों ने भविष्य में साइबर अपराधों की बढ़ती जटिलता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए संस्थान 500 से अधिक साइबर फॉरेंसिक वॉरियर्स तैयार कर रहा है। ये प्रशिक्षित योद्धा सीमापार हैकिंग, एआई-जनित फिशिंग, डीपफेक वीडियो और अन्य उभरते डिजिटल खतरों का मुकाबला करने में सक्षम होंगे।
इस पहल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत स्थिति में लाना है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, भारत सरकार के सदस्य डॉ. अजय सिंह ने बताया कि आज के साइबर खतरे केवल ईमेल या एसएमएस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वॉइस क्लोनिंग और फर्जी वीडियो कॉल के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर अपराध हो रहे हैं।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी भविष्य की तकनीकों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को कानूनी, फॉरेंसिक और तकनीकी ज्ञान को एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया। संस्थान को एक ‘वन-स्टॉप सेंटर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों के समाधान भी उपलब्ध होंगे। यह कदम राज्य को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
