27 साल बाद मारपीट मामले में आया फैसला, कोर्ट बैठने तक की सजा
कानपुर की एक अदालत ने 27 साल पुराने मारपीट मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। वर्ष 1998 में दर्ज हुए इस मुकदमे में आरोपी पति-पत्नी को दोषी करार देते हुए अदालत ने उन्हें कोर्ट बैठने तक की सजा और 3500 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा करने के बाद दोनों को रिहा कर दिया गया।
यह मामला कल्याणपुर थाने में 1998 में दर्ज हुआ था। वादी संतोष कुमार ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया था कि दो मार्च 1998 की शाम को उनके चाचा-चाची ने सरिया से उन पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने मेडिकल जांच के बाद मारपीट, धमकी और धारदार हथियार से हमला करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने कन्हई लाल और उनकी पत्नी उर्मिला देवी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में वर्ष 1999 से लगातार सुनवाई चल रही थी। अंततः, 21 नवंबर को, आरोपी पति-पत्नी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
अदालत ने दोनों को दोषी पाते हुए न्यायिक हिरासत में ले लिया और उन्हें ‘कोर्ट बैठने तक’ की सजा सुनाई, जो कि भारतीय दंड संहिता के तहत एक विशिष्ट प्रकार की सजा है। इसके साथ ही, 3500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माने की राशि अदा करने के बाद, अदालत ने दोनों को रिहा करने का आदेश दिया। इस फैसले ने लंबे समय से लंबित एक मामले का अंत किया है, जो दर्शाता है कि न्याय में भले ही देरी हो, लेकिन वह अंततः मिलता है।
