गणतंत्र दिवस पर दिखेगी ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्ष की यात्रा, लोक कलाकारों का होगा उत्सव
इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर संस्कृति मंत्रालय की झांकी देश की सामूहिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का जीवंत दस्तावेज पेश करेगी। यह झांकी केवल एक विभाग का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की भावनाओं और उसके इतिहास का प्रतिबिंब होगी।
झांकी की थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ निर्धारित की गई है, जो राष्ट्रगीत की डेढ़ शताब्दी लंबी प्रेरक और सांस्कृतिक यात्रा को कलात्मक रूप में दुनिया के सामने पेश करेगी। 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम्, भारत के लिए केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक शक्ति थी जिसने गुलामी की जंजीरों में जकड़े भारत की सामूहिक चेतना को जगाया था। झांकी के माध्यम से उसी पुकार को एक दृश्य रूप दिया गया है, जिसमें राष्ट्र को सुजलाम-सुफलाम माता के रूप में वंदनीय दिखाया गया है।
झांकी के आगे चलते हुए ट्रैक्टर पर वंदे मातरम् की ऐतिहासिक पांडुलिपि प्रदर्शित की गई है, जिसके इर्द-गिर्द देश के चारों कोनों से आए लोक कलाकार भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाते दिखेंगे। झांकी के मध्य भाग में आज की युवा पीढ़ी (जेन-जी) वंदे मातरम गीत का गायन करते हुए दिखाई जाएगी, जो विष्णुपंत पागनीस की ऐतिहासिक धुन से प्रेरित होगी। इसके अलावा, क्रांतिकारियों के बलिदान को नमन करते हुए झांकी में शहीद मदनलाल ढींगरा और खुदीराम बोस को वंदे मातरम् का स्मरण करते हुए दर्शाया गया है। झांकी के अंतिम पड़ाव में भारत माता को हाथ में तिरंगा थामे दिखाया गया है, जो वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अक्षय स्रोत के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
यह झांकी देशवासियों को राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व और उससे जुड़ी देशभक्ति की भावना से जोड़ती है, जो गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक बनेगी।
