युवाओं में एचआईवी का नया खतरा: संक्रमित सुई और समलैंगिक संबंध बने मुख्य कारण
विश्व एड्स दिवस के अवसर पर आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर से सामने आए आंकड़े युवाओं में एचआईवी संक्रमण के बदलते स्वरूप की ओर इशारा कर रहे हैं। सेंटर में 2009 से अब तक 13650 एड्स रोगी पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें पिछले एक वर्ष में 689 नए मामले सामने आए हैं।nnएआरटी सेंटर के प्रभारी डॉ. अभिषेक राज के अनुसार, हाल के वर्षों में युवाओं के एचआईवी संक्रमित होने का प्रमुख कारण नशीली दवाओं के सेवन के लिए एक ही सुई का कई लोगों द्वारा इस्तेमाल और समलैंगिक संबंध बने हैं। यह एक चिंताजनक बदलाव है, क्योंकि पहले असुरक्षित यौन संबंध, विशेषकर सेक्स वर्करों के साथ, संक्रमण का मुख्य जरिया माना जाता था। हालांकि, जागरूकता अभियानों के सकारात्मक प्रभाव के चलते एचआईवी संक्रमित सेक्स वर्करों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्तमान में सेंटर में केवल 14 एचआईवी संक्रमित सेक्स वर्करों का इलाज चल रहा है।nnसंक्रमण के अन्य कारणों में सहमति से बनाए गए असुरक्षित यौन संबंध भी शामिल हैं, जिनमें लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले युवक-युवतियां और विवाहित जोड़े भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संक्रमित खून चढ़ाने से भी संक्रमण फैलने के मामले सामने आ रहे हैं। वर्तमान में, सेंटर में 5404 एचआईवी संक्रमित मरीज एआरटी थेरेपी ले रहे हैं और बेहतर जीवन जी रहे हैं।nnसेंटर ने एचआईवी संक्रमित दंपतियों को स्वस्थ बच्चे पैदा करने में मदद करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाए हैं। एक ऐसे ही मामले में, एक एचआईवी संक्रमित युवक स्वस्थ युवती से शादी कर बच्चे पैदा करने की योजना बना रहा है। एक अन्य मामले में, एक एचआईवी संक्रमित दंपती के दोनों बच्चे भी जांच में एचआईवी नेगेटिव पाए गए हैं।nnएसएन मेडिकल कॉलेज में संचालित इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आई.सी.टी.सी.) प्रभारी डॉ. शिखा सिंह ने बताया कि एचआईवी संक्रमित दंपतियों या जिनमें पति-पत्नी में से कोई एक संक्रमित है, उन्हें गर्भधारण के लिए विस्तृत सलाह और उपचार प्रदान किया जाता है। गर्भवती एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ए.आर.टी.) शुरू कराने के बाद नौ महीने तक लगातार निगरानी में रखा जाता है। प्रसव के दौरान विशेष सावधानी बरती जाती है और नवजात को तुरंत दवाएं दी जाती हैं। 17 वर्षों में, आई.सी.टी.सी. सेंटर में 481 एचआईवी पॉजिटिव माताओं ने प्रसव कराए हैं, जिनमें से 277 बच्चे एचआईवी नेगेटिव पाए गए हैं। यह दर्शाता है कि सही समय पर उपचार और सावधानी से संक्रमण को नवजात में फैलने से रोका जा सकता है।”
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