यूपीसीएल की बिजली दरें बढ़ीं: 1000 करोड़ के घाटे की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं पर बोझ
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने बढ़ते घाटे से निपटने के लिए बिजली दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी का रास्ता चुना है। कंपनी ने अपनी बिजली दरों में 16.23 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जिसके पीछे 1,000 करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान को बताया जा रहा है। इस बढ़ोतरी से यूपीसीएल को लगभग 1,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है, जिससे न केवल घाटे की पूर्ति होगी बल्कि कुछ अतिरिक्त कमाई भी संभव होगी।
यह कदम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले वित्तीय वर्ष में भी यूपीसीएल ने 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली नई दरों में 12.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी की मांग की थी, जिसे नियामक आयोग ने आंशिक रूप से स्वीकार किया था। पिछले तीन वर्षों में राज्य में बिजली दरों में पहले ही लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। अब एक ही वित्तीय वर्ष में 16.23 प्रतिशत की प्रस्तावित वृद्धि उपभोक्ताओं पर भारी पड़ने वाली है।
उपभोक्ता संगठनों ने इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यूपीसीएल बिजली चोरी और अन्य प्रकार की हानियों को रोकने के बजाय सीधे उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रहा है। इस 16.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी का सीधा असर राज्य के लगभग 27 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। तुलनात्मक रूप से, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले छह वर्षों से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे वहां के उपभोक्ता राहत में हैं।
सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) यूपीसीएल को बार-बार बिजली चोरी और ट्रांसमिशन हानियों (एटीएंडसी लॉस) को रोकने के लिए आगाह करता रहा है। यूपीसीएल को खासकर लक्सर, लंढौरा, मंगलौर, सितारगंज, खटीमा, गदरपुर और जसपुर जैसे शहरों में सर्वाधिक ट्रांसमिशन घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इन सात शहरों में लाइन लॉस 27 से 69 प्रतिशत तक है, जिसका मुख्य कारण बिजली चोरी और बिलिंग की बकाया राशि का भुगतान न होना है। इन शहरों का उच्च लाइन लॉस राज्य के अन्य 114 शहरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
नियामक आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि लाइन लॉस का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए, और इसे 13.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होने देना चाहिए। आयोग ने यूपीसीएल को फील्ड मॉनिटरिंग मजबूत करने और बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए कई बार निर्देशित किया है। इसके बावजूद, बिजली चोरी और लाइन लॉस के कारण सालाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक इन हानियों को कम नहीं किया जाएगा, तब तक बिजली दरों में बार-बार वृद्धि करना न्यायसंगत नहीं है।
