यूपी रोडवेज में 500+ कंडक्टरों को मिलेगी नौकरी, शर्तों के साथ मिला नया अवसर
लखनऊ में सिटी बसों का संचालन बंद होने के बाद बेरोजगार हुए 500 से अधिक कंडक्टरों के लिए खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम इन अनुभवी कंडक्टरों को अपनी सेवा में वापस लेने जा रहा है। यह कदम उन सैकड़ों परिवारों के लिए सहारा बनेगा जिनकी आजीविका पर संकट आ गया था। निगम स्तर पर तय की गई व्यवस्था के अनुसार, जिन कंडक्टरों के पास 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है, उन्हें कुछ शर्तों के साथ पुनः नौकरी का अवसर मिलेगा।
पूर्व में नगरीय विकास विभाग के अधीन विभिन्न महानगरों में महानगर परिवहन सेवा के तहत सीएनजी व डीजल बसों का संचालन किया जाता था। इन बसों के संचालन की जिम्मेदारी निगम के अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की थी। सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड में संचालित बसों की आयु पूरी हो जाने के कारण उनका संचालन बंद कर दिया गया है, और अब ये बसें नीलाम हो रही हैं।
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु नारायण सिंह ने बताया कि निगम स्तर पर तय व्यवस्था के अनुसार ही कंडक्टरों को रखा जाता था, न कि किसी सेवाप्रदाता के माध्यम से। ऐसे में, लगभग 15 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाले कंडक्टरों को निगम स्तर पर निर्धारित शर्तों के अधीन पुनः रखना तर्कसंगत पाया गया है। इस निर्णय से न केवल कंडक्टरों की रोजी-रोटी सुरक्षित होगी, बल्कि परिवहन निगम को भी कंडक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी, जिससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
प्रबंध निदेशक ने आगे बताया कि नगरीय विकास विभाग की विभिन्न महानगरों में महानगरीय परिवहन सेवाओं में कार्यरत संविदा कंडक्टर, जो पूर्व में परिवहन निगम से सीधे रखे गए थे और जिनकी प्रतिभूति राशि निगम में जमा हुई है, यदि वे निगम में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, तो उन्हें पुनः निगम स्तर पर रखा जाएगा।
हालांकि, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें पूरी करनी होंगी। कंडक्टरों के पास वैध परिचालक लाइसेंस होना अनिवार्य है। साथ ही, उनके विरुद्ध कोई अनुशासनिक प्रकरण या विधिक वाद लंबित नहीं होना चाहिए, और उनकी अनुबंध अवधि खंडित नहीं होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, कंडक्टरों के पास इंटरमीडिएट की योग्यता के साथ-साथ केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थाओं से सीसीसी (कोर्स ऑन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स) कंप्यूटर प्रमाण पत्र की अर्हता भी होनी चाहिए। जिन कंडक्टरों के पास यह सीसीसी प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें इसे प्राप्त करने के लिए प्रथम चरण में छह माह का समय दिया जाएगा। प्रबंध निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि कंडक्टरों की वरिष्ठता का निर्धारण निगम में नवीन अनुबंध होने के बाद कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से किया जाएगा।
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