यूपी में एसआईआर की धीमी गति: मतदाता परेशान, बीएलओ पर खानापूर्ति का आरोप
उत्तर प्रदेश के बिलासपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की धीमी गति ने स्थानीय निवासियों को परेशान कर दिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) अपने कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बीएलओ गांव में एक निश्चित स्थान पर बैठकर केवल औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। वे घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने या उन्हें आवश्यक फार्म वितरित करने के बजाय एक ही जगह पर बैठे रहते हैं। इस लापरवाही के कारण कई मतदाता अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाने या सुधारवाने से वंचित रह रहे हैं। महेशपुरा, धावनी हसनपुर, मुल्लाखेड़ा, पंजाबनगर, भटपुरा तारन, मिलकमुंडी, पजावा, कोठा जागीर, खजुरिया खुर्द जैसे गांवों के अनीस अहमद, सखावत अली, जगतार सिंह, करतार सिंह, गुरदीप सिंह, नाजिम हुसैन सहित कई ग्रामीणों ने इस संबंध में शिकायतें दर्ज करवाई हैं।
यह अभियान प्रशासन की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर तहसील स्तरीय कर्मचारी तक लगे हुए हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिलने के कारण अधिकारी भी अब सख्त रुख अपना रहे हैं। उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अरुण कुमार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी बीएलओ द्वारा इस कार्य में लापरवाही बरती गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाना है। एसडीएम स्वयं भी ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर स्थिति की जानकारी जुटा रहे हैं।
यह घटना उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में एसआईआर अभियान के दौरान सामने आ रही बीएलओ की लापरवाही का एक और उदाहरण है। इससे पहले अमेठी, कन्नौज और ग्रेटर नोएडा जैसे जिलों से भी ऐसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जहां लापरवाही के चलते कई बीएलओ पर कार्रवाई की गई है या की जा रही है। मतदाताओं को समय पर फार्म न मिलने और बीएलओ की निष्क्रियता के कारण इस महत्वपूर्ण अभियान के उद्देश्यों पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
