0

यूपी में खाद वितरण पारदर्शी, अंगूठा लगाते ही पकड़ा जाएगा अधिक लेने वाला किसान

By Dec 5, 2025

उत्तर प्रदेश में खाद की कमी, कालाबाजारी और अनियमित वितरण से परेशान किसानों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। राज्य के कृषि विभाग ने खाद वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एल-1 पीओएस मशीन का नया वर्जन 3.3.1 लागू कर दिया है। इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब किसान जैसे ही मशीन पर अपना अंगूठा लगाएंगे, वैसे ही उनकी जोत और पूरे वर्ष में ली गई खाद का पूरा रिकॉर्ड तुरंत प्रदर्शित हो जाएगा।

इस नई व्यवस्था के लागू होने से यह तुरंत पता चल जाएगा कि यदि किसी किसान ने अपनी आवंटित जोत से अधिक मात्रा में खाद खरीदी है, तो वह तुरंत पकड़ा जाएगा। इससे खाद की कालाबाजारी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगेगा और यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सही मात्रा में खाद आसानी से उपलब्ध हो सके।

नए सिस्टम का संचालन टीएमएस सर्वर से किया जाएगा और इसमें जियो-फेंसिंग की सुविधा भी जोड़ी गई है। इसका मतलब है कि पीओएस मशीनें केवल उन्हीं दुकानों पर काम करेंगी जिनके लिए वे पंजीकृत हैं। मशीन को चालू करते ही, विक्रय केंद्र का अक्षांश और देशांतर (लोकेशन) स्वतः दर्ज हो जाएगा। यह नवाचार उर्वरकों की अवैध ढुलाई और मोबाइल मशीनों का उपयोग करके की जाने वाली गड़बड़ियों को पूरी तरह से रोकेगा। जिला कृषि अधिकारियों ने सभी थोक और फुटकर विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे खाद की बिक्री केवल इसी अपडेटेड वर्जन का उपयोग करके करें।

नए वर्जन में खाद बेचने का समय भी स्वचालित रूप से निर्धारित है। रात आठ बजे के बाद खाद बेचने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे देर रात में होने वाली अवैध बिक्री पर भी रोक लगेगी।

जनपद में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सही खाद मिल सके, इसके लिए जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और पोटाश का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हाल ही में नंदगंज रैक प्वाइंट पर 2450 मीट्रिक टन यूरिया पहुंचा है, जिसे सहकारी समितियों और निजी बिक्री केंद्रों पर वितरित किया गया है। कुल मिलाकर, जिले में 26,610 मीट्रिक टन यूरिया, 8,821 मीट्रिक टन डीएपी, 7,203 मीट्रिक टन एनपीके, 3,348 मीट्रिक टन एसएसपी और 440 मीट्रिक टन पोटाश उपलब्ध है, और आपूर्ति नियमित रूप से जारी है।

विभाग ने किसानों से अनावश्यक रूप से डीएपी का भंडारण न करने की अपील की है। साथ ही, सब्जी, केला और अन्य फसलों में टीएसपी, एनपीके, नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। नैनो डीएपी के उपयोग से बीज उपचार पर दानेदार डीएपी की आवश्यकता लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जिससे किसानों की लागत घटती है और उत्पादन में भी सुधार होता है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें