यूपी में कक्षा 1 और 2 के बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन, फरवरी 2026 तक चलेगा अभियान
उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राज्य सरकार ने कक्षा एक और दो के बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन करने का निर्णय लिया है। यह आकलन दिसंबर 2024 से शुरू होकर फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें डीएलएड प्रशिक्षु विद्यालयों का मूल्यांकन करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस आकलन का मुख्य उद्देश्य बच्चों की भाषा और गणित में दक्षता का परीक्षण करना है। इसके लिए, निपुण लक्ष्य ऐप का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय में, कक्षा एक और दो के बच्चों का आकलन किया जाएगा, जिसमें भाषा और गणित से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।
आकलन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए, कई तकनीकी उपाय किए गए हैं। जियो-फेंसिंग की व्यवस्था के कारण, आकलन केवल विद्यालय परिसर में ही संभव होगा। इसके अतिरिक्त, ऐप रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिन स्वतः निष्क्रिय रहेगा।
इस आकलन के आधार पर, छात्रों और विद्यालयों की रैंकिंग भी तय की जाएगी। जो छात्र भाषा और गणित दोनों में 75-75 प्रतिशत प्रश्नों के सही उत्तर देंगे, उन्हें निपुण विद्यार्थी घोषित किया जाएगा। यदि किसी विद्यालय में 80 प्रतिशत या उससे अधिक बच्चे निपुण पाए जाते हैं, तो उस विद्यालय को निपुण विद्यालय घोषित किया जाएगा। इसी तरह, यदि किसी विकासखंड के 80 प्रतिशत विद्यालय निपुण हो जाते हैं, तो उसे निपुण विकासखंड का दर्जा दिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों में मूलभूत शिक्षा को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि इस आकलन से बच्चों की सीखने की क्षमता का सही मूल्यांकन हो सकेगा और उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करने में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से, सरकार का लक्ष्य है कि सभी बच्चे पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को समझ सकें।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए, राज्य परियोजना कार्यालय ने सभी डायट प्राचार्यों और बीएसए को डीएलएड प्रशिक्षुओं का रोस्टर बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक प्रशिक्षु को प्रतिदिन दो विद्यालयों का आकलन करना होगा। इसके लिए, उन्हें प्रति विद्यालय 250 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यदि प्रशिक्षु अपने जिले से बाहर जाकर आकलन करते हैं, तो उन्हें दो विद्यालयों के लिए 400 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे।
समग्र शिक्षा परियोजना निदेशक, मोनिका रानी ने कहा है कि आकलन को समयबद्ध, निष्पक्ष और तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जाए, ताकि निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित हो सके। यह कार्यक्रम बच्चों को पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणनाएं सिखाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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