हिमाचल में कोहरे का खतरा: बागवानों के लिए उद्यान विभाग की विशेष एडवाइजरी
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में सर्दी की दस्तक के साथ ही कोहरे का खतरा मंडराने लगा है, जिससे फलदार पौधों की फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका बढ़ गई है। बदलते मौसम और गिरते तापमान को देखते हुए उद्यान विभाग ने क्षेत्र के बागवानों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें फलदार पौधों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
विभाग के अनुसार, कोहरा न केवल पौधों की सामान्य बढ़वार को बाधित करता है, बल्कि आने वाले मौसम की पैदावार पर भी इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आम, लीची, पपीता, अमरूद और सिट्रस (खट्टे फल) जैसे फलदार पौधे कोहरे और पाले के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। कम तापमान के कारण इन पौधों की कोशिकाओं को क्षति पहुँच सकती है, जिसका दीर्घकालिक असर फसल उत्पादन पर देखा जा सकता है। ऐसे में, पौधों को मौसम की मार से बचाने के लिए प्रभावी प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
उद्यान विभाग ने बागवानों को कुछ महत्वपूर्ण बचाव के उपाय सुझाए हैं। विभाग का कहना है कि नियमित सिंचाई से मिट्टी का तापमान सामान्य बना रहता है, जिससे पौधे पाले के प्रकोप से बच सकते हैं। छोटे और नवजात पौधों को पुआल या अन्य सामग्री से ढक कर रखना लाभकारी हो सकता है, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि पौधों के दक्षिण-पूर्व हिस्से को धूप के लिए खुला छोड़ा जाए। शाम के समय बगीचों में हल्की मात्रा में सूखी घास और पत्तों को जलाकर धुआं करने से भी तापमान को नियंत्रित करने और पौधों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
इसके अतिरिक्त, विभाग ने पोटाश की अनुशंसित मात्रा का छिड़काव करने की सलाह दी है, जिससे पौधों की कोहरे और ठंड को झेलने की क्षमता बढ़ती है। विशेष रूप से आम की पौधशालाओं और अन्य नर्सरियों को 50 प्रतिशत छाया प्रदान करने वाली नायलॉन नेट से ढकने का सुझाव दिया गया है, ताकि कोहरे का सीधा प्रभाव कम हो सके। बागवानों से आग्रह किया गया है कि वे अपने पौधों की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार के फंगल संक्रमण से बचाव के लिए समय पर एंटी-फंगल स्प्रे का प्रयोग करें। इन उपायों को अपनाकर बागवान कोहरे से होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
