यूपी के मदरसों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य, शिक्षकों और छात्रों के लिए नए नियम
विंध्य क्षेत्र के अनुदानित मदरसों में अब शिक्षकों और छात्रों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, इस नए नियम का उद्देश्य मदरसों के संचालन में पारदर्शिता लाना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और अनुपस्थिति पर अंकुश लगाना है। पहले चरण में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी, जिसके बाद छात्रों की बायोमेट्रिक उपस्थिति भी शुरू की जाएगी।
जनपद में संचालित पांच अनुदानित मदरसों में यह नियम लागू किया जा रहा है। इन मदरसों में मदरसा अरबिया इलियटघाट, मदरसा अरबिया सुहैलिया मिल्लतनगर नटवा, मदरसा अरबिया रजाये मुस्तफा विजयपुर छानबे, मदरसा गौसिया इस्लामियां बेगपुर नरायनपुर और मदरसा इस्लामिया गरौड़ी अदलहाट शामिल हैं। इन मदरसों में कुल 64 शिक्षक, 13 कर्मचारी और 2200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रामदत्त प्रजापति ने बताया कि इस कदम से मदरसों के संचालन में पारदर्शिता आएगी और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं तक पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक हाजिरी के बिना शिक्षकों को वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर सभी मदरसों में बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने के निर्देश दिए हैं।
यह कदम मदरसों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सूत्रों के अनुसार, इस नियम के लागू होने से शिक्षकों और छात्रों दोनों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में आसानी होगी, जिससे फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी।
इस निर्णय का स्वागत करते हुए, कई शिक्षाविदों का मानना है कि यह मदरसों में शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने में सहायक होगा। इससे छात्रों को नियमित रूप से कक्षाएं लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उनकी शिक्षा में सुधार होगा।
यह भी बताया गया है कि हाजिरी में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से सरकार का उद्देश्य मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और छात्रों के भविष्य को उज्ज्वल बनाना है।
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