दो जगह से SIR फॉर्म भरने पर होगी कानूनी कार्रवाई? चुनाव आयोग ने दिया स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति दो स्थानों से एसआईआर फॉर्म भरता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आयोग के अनुसार, ऐसा करना गैरकानूनी है क्योंकि यह दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डालने का प्रयास माना जा सकता है। यह स्पष्टीकरण मतदाताओं को भ्रम से बचाने के लिए जारी किया गया है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-31 के तहत ऐसे लोगों को एक वर्ष तक की सजा या जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इस बार चुनाव आयोग ने डिजिटल माध्यम से ऐसी फूलप्रूफ मानिटरिंग तैयार की है कि दो जगह से फार्म जमा करने वाले चंद मिनटों में पकड़ में आ जाएंगे। एसआइआर के नियम साफ हैं -मतदाता चाहे अपने पुश्तैनी गांव से वोट डालना चाहते हों या शहर से, उन्हें केवल एक ही स्थान से गणना प्रपत्र जमा करना होगा। शहरी और ग्रामीण सीमा पर रहने वाले कई लोगों में भ्रम है कि दोनों जगह वोटर होने पर क्या करना है, लेकिन इस बार दोहरी प्रविष्टि बिल्कुल नहीं चलेगी।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने स्पष्ट किया है कि एसआइआर फार्म के साथ किसी भी तरह का संलग्नक या दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। सिर्फ माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और आधार जैसी बुनियादी जानकारियां भरकर प्रपत्र जमा करना है। लोग यह सोचकर घबरा रहे हैं कि नाम कट जाएगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। नाम कटने का डर पूरी तरह निराधार है।
फार्म जमा करते समय उसकी एक कापी सुरक्षित रखें। भविष्य में किसी भी तरह की जांच या क्रॉस-वेरिफिकेशन में यह कापी बेहद काम आएगी। एसआइआर का मकसद डुप्लीकेसी, मृतक मतदाता और फर्जी नामों को हटाना है, न कि किसी का सही वोट काटना।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह के अनुसार जो लोग बीएलओ के माध्यम से फार्म नहीं भर पाए हैं, वे वोटर्स डाट इसीआई डाट जीओवी डाट इन पर जाकर आनलाइन गणना प्रपत्र जमा कर सकते हैं। ध्यान रहे -मोबाइल नंबर का वोटर आइडी से लिंक होना अनिवार्य है। मतदाता घर बैठे यह भी पता लगा सकते हैं कि उनका एसआइआर फार्म बीएलओ द्वारा आनलाइन सब्मिट हुआ है या नहीं। पोर्टल पर ईपीक नंबर डालते ही पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिख जाएगी।
