मुंबई में 4 साल से मेयर क्यों नहीं? जानिए Mumbai BMC elections में देरी का कारण
मुंबई को अक्सर सपनों का शहर कहा जाता है, लेकिन पिछले चार सालों से यह शहर बिना मेयर के चल रहा है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का बजट 74,427 करोड़ रुपये है, फिर भी शहर की सड़कों पर गड्ढे, उपनगरों में कूड़े के पहाड़ और बदबूदार जल निकासी की समस्या आम है।
BMC में मेयर का पद मार्च 2022 से खाली है। हालांकि, मुंबई के मेयर की भूमिका दिल्ली के मेयर की तरह कार्यकारी नहीं होती है। मुंबई में दैनिक प्रशासन, बजट और नीति कार्यान्वयन की शक्तियां नगर आयुक्त (एक IAS अधिकारी) के पास होती हैं। फिर भी, मेयर शहर का ‘प्रथम नागरिक’ होता है और BMC की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
BMC चुनावों में देरी के पीछे महाराष्ट्र की जटिल राजनीति है। शिवसेना ने 1985 से BMC पर नियंत्रण रखा है। पिछले कुछ वर्षों में, वार्डों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 करने के प्रस्ताव और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण लागू करने के कानूनी विवादों के कारण चुनाव बार-बार टलते रहे।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार ने नवंबर 2021 में वार्डों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इन कानूनी लड़ाइयों के कारण चुनाव प्रक्रिया में लंबा समय लगा। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने BMC सहित 28 नगर निगमों के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा की है, जिससे मुंबई को जल्द ही अपना नया मेयर मिलने की उम्मीद है।
