0

मुंबई BMC चुनाव: 4 साल बाद मेयर के लिए वोटिंग, क्या बदलेगी ‘सपनों की नगरी’?

By Dec 22, 2025

मुंबई, जिसे ‘सपनों की नगरी’ कहा जाता है, पिछले चार सालों से बिना मेयर के चल रही है। एशिया की सबसे अमीर नगर निगम (BMC) होने के बावजूद, शहर की सड़कें गड्ढों से भरी हैं, उपनगरों में कूड़े के पहाड़ जमा हैं और अरब सागर का पानी गंदे नाले जैसा दिखता है। यह सब दिखाता है कि शहर की नागरिक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया है।

मुंबई में आखिरी मेयर चुनाव 2017 में हुए थे और किशोरी पेडनेकर का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था। तब से लेकर अब तक, शहर को एक निर्वाचित प्रतिनिधि के बिना चलाया जा रहा था। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने BMC समेत राज्य की 28 नगर निगमों के चुनाव की घोषणा की है।

इस देरी के पीछे महाराष्ट्र की जटिल राजनीतिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। BMC चुनाव में देरी के मुख्य कारण वार्डों की संख्या को 227 से बढ़ाकर 236 करने का प्रस्ताव और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण लागू करने का मामला था। ये दोनों मुद्दे अदालती लड़ाई में उलझे रहे।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मुंबई में मेयर की भूमिका काफी हद तक औपचारिक होती है। मेयर के पास दिल्ली के मेयर की तरह कार्यकारी शक्तियां नहीं होती हैं। BMC का दैनिक प्रशासन, बजट और नीति कार्यान्वयन की जिम्मेदारी नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होती है, जो महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त एक IAS अधिकारी होता है। हालांकि, मेयर शहर का ‘पहला नागरिक’ होता है और BMC की बैठकों की अध्यक्षता करता है।

About

Journalist covering latest updates.

अगली खबरें

मुंबई में 4 साल से मेयर क्यों नहीं? जानिए Mumbai BMC elections में देरी का कारण

मुंबई को अक्सर सपनों का शहर कहा जाता है, लेकिन पिछले चार सालों से यह शहर बिना मेयर के चल रहा है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का बजट 74,427...
By Dec 22, 2025

साझा करें