WhatsApp यूजर्स सावधान! 3.5 बिलियन मोबाइल नंबर लीक, डेटा सुरक्षा पर मंडराया खतरा
नई दिल्ली। क्या आप भी इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं? यदि हाँ, तो आपके लिए एक चिंताजनक खबर है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, WhatsApp में एक बड़ी सुरक्षा खामी सामने आई है, जिसके कारण लगभग 3.5 बिलियन यानी 350 करोड़ यूजर्स के मोबाइल नंबर ऑनलाइन लीक हो गए हैं। यह संख्या ऐप के लगभग हर सक्रिय यूजर को कवर करती है, जिससे दुनिया भर के यूजर्स का डेटा खतरे में पड़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह गलती किसी हैकर ग्रुप के अटैक की वजह से नहीं हुई है, बल्कि WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta की लापरवाही से हुई है। 9To5Mac की रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी को इस समस्या के बारे में आठ साल पहले ही जानकारी दे दी गई थी, लेकिन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वर्ष 2017 में, University of Vienna के शोधकर्ताओं ने इस खामी की ओर ध्यान दिलाया था। उन्होंने बताया था कि इसकी मदद से WhatsApp यूजर्स के मोबाइल नंबर आसानी से हासिल किए जा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने सिर्फ आधे घंटे के अंदर अमेरिका के 3 करोड़ से ज्यादा लोगों के मोबाइल नंबर इकट्ठा कर लिए थे। बाद में टीम ने इस डेटा को डिलीट कर दिया और Meta को दोबारा इसकी जानकारी दी।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस खामी को ‘सिंपल’ नाम दिया और चेतावनी दी कि अगर यह तकनीक हैकर्स के हाथ लग गई, तो यह इतिहास के सबसे बड़े डेटा लीक में बदल सकता है।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यह समस्या WhatsApp के नंबर-वेरिफिकेशन प्रोसेस में है। जब कोई यूजर किसी नए नंबर को अपने फोन में सेव करता है, तो ऐप यह बताता है कि वह नंबर WhatsApp पर एक्टिव है या नहीं। इसी प्रक्रिया में मौजूद खामी बड़े डेटा लीक की वजह बनी है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद, मेटा ने कहा है कि यह मामला उनके बग बाउंटी प्रोग्राम का हिस्सा है और University of Vienna के साथ सहयोग से इस बड़ी खामी का पता लगाया गया। कंपनी ने दावा किया है कि वह इस समस्या को ठीक करने पर काम कर रही है।
इस घटना से WhatsApp यूजर्स की डेटा सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूजर्स को अपनी गोपनीयता की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जिसमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करना और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना शामिल है।
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