विवाह पंचमी 2025: शुभ संयोग, ऐसे करें पूजा, राम-सीता बरसाएंगे कृपा
हिन्दू पंचांग के अनुसार, विवाह पंचमी का पर्व भगवान श्री राम और देवी सीता के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह दिन अत्यंत शुभकारी माना जाता है और इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और प्रभु श्री राम व माता सीता की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है।
विवाह पंचमी के दिन, भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना विशेष शुभ माना जाता है। इसके पश्चात, रामदरबार के समक्ष घी का दीपक प्रज्जवलित किया जाता है और भगवान राम एवं माता सीता का ध्यान किया जाता है। प्रभु को लाल पुष्प, मिष्ठान्न और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सीता चालीसा का पाठ करने से भगवान राम अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सीता चालीसा के पाठ से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
सीता चालीसा के अंश:
बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम,
राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम ॥
कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम,
मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम ॥
राम प्रिया रघुपति रघुराई बैदेही की कीरत गाई ॥
चरण कमल बन्दों सिर नाई, सिय सुरसरि सब पाप नसाई ॥
इस प्रकार, विवाह पंचमी के दिन की गई पूजा-अर्चना और भक्तिभाव से किए गए अनुष्ठान भक्तों को प्रभु राम और माता सीता का आशीर्वाद दिलाते हैं, जिससे जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और सकारात्मकता का संचार होता है।
