वैशाली सुपरफास्ट अब एक्सप्रेस बनी, यात्रियों को मिली बड़ी राहत; किराया हुआ कम, नया नंबर जारी
उत्तर बिहार और नई दिल्ली के बीच सबसे पसंद की जाने वाली वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस आज यानी 7 दिसंबर से अपने स्वरूप, पहचान और संचालन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लेकर चलेगी। दशकों से लाखों यात्रियों की पहली पसंद रही इस ट्रेन का नंबर बदल दिया गया है। सुपरफास्ट से एक्सप्रेस श्रेणी में परिवर्तित कर दिया गया है। अब यह ट्रेन पुराने नंबर 12553 और 12554 की जगह नए नंबर 15565 और 15566 से चलेगी।
श्रेणी बदलने के साथ ही रेलवे ने इस ट्रेन के किराए में भी कमी कर दी है। स्लीपर से लेकर एसी तक सभी श्रेणियों में भाड़ा घटने से यात्रियों को काफी राहत मिलने वाली है। इस नई व्यवस्था के तहत 7 दिसंबर की यात्रा के लिए टिकटों की बुकिंग भी 60 दिन पहले से नए नंबर के साथ की जा रही है।
वैशाली एक्सप्रेस के इतिहास में यह बड़ा बदलाव ऐसे समय आया है, जब हाल ही में ट्रेन के रूट का विस्तार भी किया गया है। पहले यह ट्रेन सहरसा तक चलती थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर ललितग्राम तक विस्तारित कर दिया गया है। यह चौथी बार है जब इस लोकप्रिय ट्रेन के रूट में विस्तार हुआ है। उत्तर बिहार के लोगों के लिए यह ट्रेन हमेशा से दिल्ली की ओर जाने का सबसे सुविधाजनक और भरोसेमंद साधन मानी जाती रही है।
किराए में कमी और रूट विस्तार के बाद अब इससे लाभ उठाने वाले यात्रियों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। वैशाली एक्सप्रेस का इतिहास उतना ही गौरवमय है जितना इसका सफर। इसका शुभारंभ 31 अक्टूबर 1973 को ‘जयंती जनता एक्सप्रेस’ के नाम से हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र ने किया था। उस समय यह ट्रेन समस्तीपुर से खुलकर बरौनी, मोकामा और पटना होते हुए नई दिल्ली जाया करती थी। भूरे रंग के कोच, डाइनिंग कार, पुस्तकालय, एसी और स्लीपर कोच उस दौर के हिसाब से इसमें दी गई सुविधाए किसी लग्जरी ट्रेन से कम नहीं थी। यही वजह थी कि मिथिला और दिल्ली के बीच चलने वाली यह ट्रेन धीरे-धीरे यात्रियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गई।
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