रतलाम में यूरिया संकट: किसानों का फूटा गुस्सा, रातभर गोदाम के बाहर डेरा, कालाबाजारी के आरोप
रतलाम में यूरिया खाद की कमी से परेशान किसानों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर नजर आया। मंडी स्थित एमपी एग्रो गोदाम पर बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए और यूरिया उपलब्ध न होने के विरोध में धरना देकर जमकर नारेबाजी की। हालात ऐसे बन गए कि कई किसानों को रात में गोदाम के बाहर ही बिस्तर लगाकर ठंड में गुजर करना पड़ा।
किसानों ने बताया कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसान पूरी रात लाइन में लगते हैं, सुबह टोकन पाने के लिए संघर्ष करते हैं और सीमित टोकन होने के कारण कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान हो रहा है। किसानों की मुख्य मांग यूरिया के नकद विक्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाने और गांवों की सोसाइटियों पर भी नकद में खाद उपलब्ध कराने को लेकर थी।
किसान नेता देवेंद्र सिंह सेजावता ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में यूरिया की कालाबाजारी चरम पर है। 266.50 रुपये की निर्धारित कीमत वाली यूरिया की बोरी किसानों को मजबूरी में 300 से 450 रुपये तक में खरीदनी पड़ रही है। लाइन से बचने के लिए किसान ब्लैक में महंगे दामों पर खाद लेने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि गांव की सोसाइटियों पर ही नकद में यूरिया वितरित किया जाए और नगद विक्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, तो किसानों को राहत मिलेगी और कालाबाजारी पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
धरने की सूचना मिलते ही कृषि विभाग की उप संचालक नीलम चौहान मौके पर पहुंचीं और किसानों से चर्चा की। उन्होंने यूरिया वितरण व्यवस्था में सुधार का आश्वासन देते हुए मंगलवार से तहसील कार्यालय के माध्यम से टोकन सिस्टम लागू करने की घोषणा की। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त किया। किसानों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें भी रखीं।
