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कश्मीर में मस्जिद-मदरसा सर्वे पर बवाल: अलगाववाद की कोशिश या राजनीतिक साजिश?

By Jan 21, 2026

जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों, मदरसों और इमामों के सर्वेक्षण को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। कुछ प्रमुख राजनीतिक दल इस प्रशासनिक प्रक्रिया को इस्लाम पर हमला करार दे रहे हैं, जबकि कई समाजसेवियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक आवश्यक कदम है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

इस विवाद की जड़ में मस्जिदों, मदरसों और इमामों की जानकारी जुटाने के लिए प्रशासन द्वारा शुरू किया गया सर्वे है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ऐसी जानकारी जुटाने पर बवाल हुआ हो। पहले जहां अलगाववादी खेमा इसका विरोध करता था, वहीं अब मुख्यधारा की राजनीति करने वाले दल इसे सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन और मीरवाइज मौलवी उमर फारूक जैसे नेताओं ने इस सर्वे का विरोध करते हुए इसे इस्लाम पर आघात बताया है। महबूबा मुफ्ती ने तो यहां तक कहा कि पहले मंदिरों और पुजारियों की जांच की जानी चाहिए।

दूसरी ओर, कश्मीर के समाजसेवी सलीम रेशी ने इस हंगामे की आवश्यकता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, ओमान, कतर और यूएई जैसे देशों में भी मस्जिदों की निगरानी होती है, इमामों की नियुक्ति और उनके खुतबों के विषयों पर सरकार का नियंत्रण होता है। इंडोनेशिया जैसे इस्लामिक देशों में भी मस्जिदों का पंजीकरण और गतिविधियों की निगरानी की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कश्मीर में ऐसा हो रहा है, तो इसमें कुछ भी बुराई नहीं है।

कश्मीर मामलों के जानकार सैयद अमजद शाह ने इस मुद्दे को आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में लंबे समय से आतंकी हिंसा झेलने के पीछे संकीर्ण धार्मिक विचारधारा है, जो सूफी इस्लामिक विचारधारा के विपरीत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे कुछ धार्मिक प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और टेरर फाइनेंसिंग के लिए किया गया है।

एडवोकेट अजात जम्वाल ने संविधान के मौलिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बात कही। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता कभी भी पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने भारत के अन्य धार्मिक स्थलों, जैसे मंदिरों के ऑडिट और पुजारियों के पंजीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि मस्जिदों को प्रशासनिक निगरानी से बाहर नहीं रखा जा सकता।

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