यूपी पंचायत चुनाव: हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग से पूछा- क्या समय पर पूरे होंगे चुनाव?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक मर्यादाओं के अनुसार, पंचायतों का कार्यकाल किसी भी स्थिति में पांच वर्ष की अवधि से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी के कारण चुनाव समय पर होने को लेकर संशय गहरा रहा था।
कोर्ट ने इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-E का उल्लेख किया। इस अनुच्छेद के तहत पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से पांच वर्ष के लिए होता है। उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसका अर्थ है कि इनका कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखों में बार-बार संशोधन किया है। पहले जो काम दिसंबर 2025 में पूरा होना था, उसे बढ़ाकर अब 15 अप्रैल 2026 कर दिया गया है। ऐसे में मतदाता सूची फाइनल होने के बाद आरक्षण की प्रक्रिया में लगने वाला समय चुनाव को समय पर होने से रोक सकता है।
कानूनी पेच फंसा होने के बावजूद, उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री लगातार दावा कर रहे हैं कि चुनाव समय पर ही कराए जाएंगे। सरकार की मंशा चुनाव टालने की बिल्कुल नहीं है। इसका प्रमाण जिलों में चल रही प्रशासनिक हलचल से मिलता है। मतपत्रों (Ballot Papers) की छपाई का काम युद्धस्तर पर जारी है और कई जिलों में मतपत्र पहुंचाए भी जा चुके हैं। प्रशासन ने मतदान पेटियों (Ballot Boxes) के रख-रखाव और पोलिंग बूथों के चिन्हीकरण का काम भी शुरू कर दिया है।
हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। आयोग को यह बताना होगा कि क्या 15 अप्रैल को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद 26 मई 2026 तक मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराना संभव है। कोर्ट ने अपेक्षा की है कि अगली सुनवाई की तिथि 25 मार्च 2026 तक विस्तृत ब्योरा रिकॉर्ड पर लाया जाए। साथ ही, महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
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