यूपी धर्मांतरण गिरोह: चार और सदस्य गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर करते थे ब्रेनवॉश
आगरा पुलिस ने एक बड़े धर्मांतरण गिरोह के चार और सदस्यों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की भी मदद ली गई। दिल्ली और राजस्थान में दबिश देकर इन आरोपियों को पकड़ा गया है। पकड़े गए चार आरोपियों में से तीन का संबंध कलीम सिद्दीकी से भी पाया गया है, जो इस गिरोह के प्रमुख सदस्यों में से एक है। यह गिरोह धर्मांतरण के बाद सभी आवश्यक कागजात तैयार करवाने का काम भी करता था।
यह मामला तब सामने आया था जब वर्ष 2025 में आगरा की दो सगी बहनें रहस्यमय तरीके से घर से लापता हो गईं थीं। शुरू में अपहरण का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह एक राष्ट्रव्यापी धर्मांतरण रैकेट से जुड़ा पाया गया। इस गिरोह में महिलाओं की भी संलिप्तता पाई गई थी। पहले की कार्रवाई में छह राज्यों में दबिश देकर एक महिला सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरोह का सरगना दिल्ली का अब्दुल रहमान बताया गया था। हाल ही में, कनाडा में बैठे एक फाइनेंसर के भोपाल स्थित घर पर कुर्की की कार्रवाई भी की गई थी। पिछले साल गिरफ्तार किए गए सभी 14 आरोपी अभी भी जेल में हैं।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। मोबाइल और लैपटॉप से मिले डेटा के विश्लेषण के बाद पुलिस को चार और सक्रिय सदस्यों के नाम पता चले। इन सभी की गिरोह में अलग-अलग भूमिकाएं थीं। कोई फर्जी दस्तावेज तैयार करता था, कोई धन मुहैया कराता था, कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर लोगों का ब्रेनवॉश करता था, तो कोई दिल्ली में छिपने के ठिकाने उपलब्ध कराता था। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद दिल्ली और राजस्थान में दबिश दी और चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने उन्हें रिमांड पर भेज दिया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में ईस्ट दिल्ली के तलमीज उर रहमान, नॉर्थ दिल्ली के परवेज अख्तर, वेस्ट दिल्ली के जतिन कपूर और भरतपुर के हसन मोहम्मद शामिल हैं। हसन मोहम्मद लंबे समय से गिरोह से जुड़ा हुआ है और पहले कलीम सिद्दीकी के लिए काम करता था। वह तब से अब्दुल रहमान के संपर्क में है। पुलिस का दावा है कि तलमीज उर रहमान भी अब्दुल रहमान से जुड़ा है और उसके साथ जमात में जाता था। परवेज अख्तर वह व्यक्ति है जो धर्म परिवर्तन के लिए किताबें तैयार कराता था, जिनका उपयोग लोगों को ब्रेनवॉश करने के लिए किया जाता था। वह गिरोह को धन भी मुहैया कराता था। जतिन कपूर गिरोह को दिल्ली में ठिकाने उपलब्ध कराने का काम करता था। इस गिरोह का खुलासा होने से समाज में चिंता का माहौल है, क्योंकि यह सीधे तौर पर युवाओं के ब्रेनवॉश और उनकी पहचान को बदलने का प्रयास कर रहा है।
