यूपी बजट सत्र: प्रश्न निलंबित होने पर गरमाई सियासत, स्पीकर ने विपक्ष पर साधा निशाना
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र अपने नौवें दिन भी हंगामेदार रहा, जहाँ प्रश्न निलंबित किए जाने के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वे दबाव में हैं। यह घटनाक्रम सदन में चल रही गहमागहमी और राजनीतिक खींचतान को उजागर करता है। आज के UP Budget Session में कृषि, सिंचाई, नगर विकास और एमएसएमई सहित चार महत्वपूर्ण विभागों का बजट सदन में प्रस्तुत किया जाएगा, जिस पर सदस्यों को बोलने का अवसर मिलेगा।
सत्र के दौरान कई अन्य मुद्दों पर भी गरमागरम बहस हुई। समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने वाराणसी में मंडी सड़क और टाइल्स के भुगतान में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से सवाल किया। उन्होंने दावा किया कि 12 लाख रुपये के काम के लिए 3 करोड़ से अधिक और 4 लाख की टाइल्स के लिए 34 लाख का भुगतान किया गया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के जवाब से असंतुष्ट सपा विधायकों ने हंगामा किया, जिसके बाद स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा।
निजीकरण के मुद्दे पर विधान परिषद में भी सपा और भाजपा सदस्यों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। सपा विधायक आशुतोष सिंहा ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिस पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा शासन में काशी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम थी, जो अब कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सपा ने अच्छा काम किया होता तो आज वे सत्ता पक्ष में होते।
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप के अधिक समय तक बोलने पर स्पीकर ने उन्हें टोका। सपा विधायकों ने नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और पिछड़े वर्ग के युवक-युवतियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण न दिए जाने जैसे मुद्दे भी उठाए। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और सपा विधायक रागिनी सोनकर के बीच बिजली बिल में छूट और गरीबों को दी जा रही सुविधाओं को लेकर भी तीखी बहस हुई। एके शर्मा ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार लाइफलाइन उपभोक्ताओं को 53 प्रतिशत कम दर पर बिजली दे रही है, जिससे करीब 3.72 करोड़ उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवान राम का बाण चल चुका है और 2027 में विपक्ष का सफाया निश्चित है।
ये सभी बहसें और आरोप-प्रत्यारोप उत्तर प्रदेश की जनता के सामने राज्य के विकास और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को लाते हैं। सदन में चल रही यह राजनीतिक खींचतान आगामी चुनावों और राज्य की दिशा पर गहरा असर डाल सकती है।
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