बरला में ‘Foot Rot’ बीमारी का इलाज शुरू, पशुपालन विभाग ने गांवों में चलाया अभियान
बरला क्षेत्र के गांवों में पशुओं में ‘फुट रॉट’ (पका) बीमारी फैलने की खबर सामने आने के बाद पशुपालन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने नगला खेरसा और मोकमपुर गांवों का दौरा किया और बीमार पशुओं की गहन जांच की। विशेषज्ञों ने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से ‘फुट रॉट’ है, जो पशुओं के पैरों को प्रभावित करती है। विभाग की इस मुस्तैदी और त्वरित उपचार मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
उपचार और बचाव के तरीके
पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर ही बीमार पशुओं का उपचार शुरू किया। गंभीर रूप से प्रभावित पशुओं के लिए विशेष दवाओं का प्रबंध किया गया। डॉक्टरों ने संक्रमण को रोकने के लिए कई कदम उठाए। पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए एंटीबायोटिक्स और सूजन कम करने की दवाएं दी गईं। पैरों के घावों को साफ करने के लिए कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) और पोटेशियम परमैंगनेट (लाल दवा) के घोल से पैरों को धोने की सलाह दी गई। घावों पर लगाने के लिए एंटीसेप्टिक स्प्रे और मरहम भी वितरित किए गए।
ग्रामीणों के लिए सलाह
डॉक्टरों ने ग्रामीणों को समझाया कि ‘फुट रॉट’ एक जीवाणु जनित बीमारी है जो नमी और गंदगी के कारण फैलती है। इससे बचाव के लिए पशुओं के बांधने के स्थान को सूखा रखना आवश्यक है। संक्रमित पशु के पैरों को नियमित रूप से दवा के घोल से साफ करने और बीमार पशु का चारा-पानी अलग रखने की सलाह दी गई ताकि अन्य पशु सुरक्षित रहें। विभाग ने आश्वासन दिया है कि आगामी कुछ दिनों तक टीम क्षेत्र पर नजर रखेगी।
