टोल फ्री नंबर 102 व्यस्त, एंबुलेंस की सेवा लेने में मरीज हो जा रहे पस्त
टोल फ्री नंबर 102 पर कॉल कर सरकारी एंबुलेंस की सेवा लेने में जिले के मरीजों का दम फूल रहा है। एक नहीं, दस-दस बार कॉल करने पर यह नंबर हमेशा व्यस्त बताता है। यदि कॉल लग भी गया तो यह जरूरी नहीं कि एंबुलेंस सेवा तुरंत मिल जाए।
ऐसे में मरीजों को सरकारी एंबुलेंस की सेवा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। खासकर प्रसव वेदना से पीड़ित महिलाओं को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अंत में स्वजन ऑटो-टोटो पर लादकर अस्पताल तक पहुंचते हैं।
सन्हौला निवासी आलोक यादव को गत सप्ताह गंभीर हालत में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल से पीएमसीएच रेफर किया गया। उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था। डॉक्टरों ने तत्काल रेफर किया। परिजन एंबुलेंस के लिए कॉल करते रहे। आधे घंटे से अधिक समय तक लगातार कॉल करने के बाद नंबर लगा। वहां से बताया गया कि एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। अंत में परिजनों ने निजी एंबुलेंस से मरीज को पटना ले जाना पड़ा। यानी जो सेवा तुरंत मिलनी चाहिए थी, उसके लिए दो घंटे से अधिक समय लग गया।
इसी तरह मिरजानहाट में एक गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने रात में एंबुलेंस के लिए कॉल करना शुरू किया। एक घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी सेवा नहीं मिली। आखिरकार स्वजन गर्भवती को टोटो में बैठाकर सरकारी अस्पताल ले गए।
सरकारी एंबुलेंस सेवा प्राप्त करने के लिए 102 नंबर पर कॉल करना होता है। पूरे बिहार में इसी नंबर से एंबुलेंस मुफ्त में बुक की जाती है। कुछ महीनों से इस नंबर पर कॉल करने पर हमेशा व्यस्त बताया जाता है। बात हो गई तो किस्मत है। साल भर पहले स्थानीय स्तर पर अस्पताल के हेल्थ मैनेजर इस सेवा को आसानी से उपलब्ध करा देते थे। अब यह नियम बना दिया गया है कि मरीज के परिजन अपने नंबर से कॉल करेंगे तभी सेवा मिलेगी। ऐसे में अस्पताल कर्मियों और हेल्थ मैनेजरों के हाथ से यह अधिकार छिन गया है।
