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“title”: “पाकिस्तान: सेना प्रमुख को मिली ‘असीम’ परमाणु शक्ति, लोकतंत्र पर गंभीर चिंता”,

By Nov 12, 2025

“subtitle”: “नेशनल असेंबली ने विवादास्पद 27वां संविधान संशोधन विधेयक पारित किया, विपक्ष ने लोकतंत्र पर खतरे की आशंका जताई।”,

“summary”: “पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने एक विवादास्पद संविधान संशोधन विधेयक पारित किया है, जिससे सेना प्रमुख को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय लेने का अधिकार मिल गया है। विपक्ष ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है, यह आरोप लगाते हुए कि यह देश में लोकतंत्र को कमजोर करेगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा, जिससे सेना की शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।”,

“content”: “पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने एक बेहद विवादास्पद संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया है, जिसने सेना प्रमुख को देश के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय लेने का अधिकार प्रदान कर दिया है। यह कदम पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य शक्ति संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जिस पर देश के भीतर और बाहर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।nnबुधवार को नेशनल असेंबली में दो-तिहाई बहुमत से पारित हुए 27वें संविधान संशोधन विधेयक को उच्च सदन सीनेट पहले ही मंजूरी दे चुका था। उम्मीद है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी जल्द ही इस पर हस्ताक्षर कर देंगे, जिसके बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा। कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने विधेयक पेश करते हुए बताया था कि इसके कानूनी प्रावधानों की देश के वकीलों की कई परिषदों और बार एसोसिएशनों ने जांच की है और इसे विधिसम्मत पाया है।nnनए कानून के तहत, प्रधानमंत्री की संस्तुति पर राष्ट्रपति सेना प्रमुख और तीनों सेनाओं के प्रमुख को नियुक्त करेंगे। सेना प्रमुख, जो तीनों सेनाओं का प्रमुख भी होगा, वह प्रधानमंत्री के परामर्श से नेशनल स्ट्रैटजिक कमांड (एनएससी) के प्रमुख की नियुक्ति करेगा। इस नई व्यवस्था में पाकिस्तानी सेना का एक अधिकारी ही एनएससी का प्रमुख होगा, और यही कमांड परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर अंतिम निर्णय लेगी। इसके अतिरिक्त, फील्ड मार्शल बनने वाले सैन्य अधिकारी का यह ओहदा आजीवन रहेगा।nnगौरतलब है कि भारत के साथ चार दिन चले सैन्य टकराव के कुछ ही समय बाद पाकिस्तान सरकार ने मौजूदा सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया था। पाकिस्तान के इतिहास में उनसे पहले केवल अयूब खान को ही यह प्रतिष्ठित पद दिया गया था। इस विधेयक में संविधान से जुड़े मामलों की निगरानी और सुनवाई के लिए संघीय संवैधानिक न्यायालय के गठन का भी प्रावधान है, जबकि देश का सुप्रीम कोर्ट अब केवल माल और फौजदारी के मुकदमों की सुनवाई करेगा।nnइस विधेयक का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सदस्यों ने नेशनल असेंबली में विधेयक की प्रतियां फाड़कर प्रधानमंत्री के आसन की ओर उछालीं और बाद में मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार कर सदन से बाहर चले गए। मतदान के बाद स्पीकर अयाज सादिक ने बताया कि विधेयक के पक्ष में 234 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल चार सदस्यों ने वोट डाला। इस दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी भी सदन में मौजूद थे।nnविपक्षी दलों के गठबंधन, तहरीक तहफुज आईन-ए-पाकिस्तान, ने इस नए कानून का देश भर में विरोध करने का ऐलान किया है। तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख गौहर अली खान ने चेतावनी दी है कि इस कानून के लागू होने के बाद देश में लोकतंत्र केवल नाम के लिए ही रह जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन सेना की शक्ति को और मजबूत करेगा, जिससे पाकिस्तान में नागरिक सरकार की भूमिका और कमजोर हो सकती है

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