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“title”: “कानपुर में बनेंगे 157 नए आंगनबाड़ी केंद्र, बाल विकास को मिलेगा नया आयाम”,

By Nov 13, 2025

“subtitle”: “48 अतिरिक्त केंद्रों को भी मिली मंजूरी; किराये से मुक्ति और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा”,

“summary”: “कानपुर जिले में बच्चों के विकास और पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहाँ 157 नए आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि 48 अतिरिक्त केंद्रों को भी स्वीकृति मिली है। इस पहल से किराए के भवनों से मुक्ति मिलेगी, ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिलेगा और बच्चों, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर पोषण व स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकेंगी।”,

“content”: “कानपुर जिले में बच्चों के समग्र विकास और पोषण संबंधी सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। जिले में 157 नए आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि 48 अतिरिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों को भी मंजूरी मिल गई है। इस निर्णय से बाल विकास कार्यक्रमों को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार होगा।nnजागरण संवाददाता, कानपुर के अनुसार, इन नए भवनों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थायी संरचना प्रदान करना है। वर्तमान में जिले में कुल 2134 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 500 केंद्र अभी भी किराए के भवनों में चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त कई केंद्र पंचायत भवनों या अन्य सार्वजनिक भवनों में संचालित होते हैं। नए भवनों के निर्माण से इन केंद्रों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण मिलेगा।nnइस परियोजना से न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उपायुक्त मनरेगा सीएम कनौजिया ने बताया कि एक आंगनबाड़ी भवन के निर्माण पर लगभग 11 लाख रुपये की लागत आएगी। इन भवनों के तैयार होने से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार मिलेगा और आंगनबाड़ी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। इससे बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं को पोषण, टीकाकरण और शिक्षा संबंधी सेवाएं समय पर और कुशलता से मिल पाएंगी।nnजिला कार्यक्रम अधिकारी प्रीती सिन्हा ने बताया कि आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण तेजी से हो रहा है और नए 48 आंगनबाड़ी केंद्र भी स्वीकृत हुए हैं। प्रत्येक परियोजना की गहन निगरानी की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि सभी नए भवनों में बच्चों के अनुकूल कक्ष, पोषण कक्ष, बैठक स्थल, शौचालय और सुरक्षित पेयजल जैसी अनिवार्य सुविधाएं शामिल

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