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“title”: “भूमि घोटाले में फंसे पूर्व DC विनय चौबे की जमानत खारिज, एक और जांच तेज”,

By Dec 4, 2025

“subtitle”: “हजारीबाग के पूर्व उपायुक्त की जमानत अर्जी अदालत ने ठुकराई, दूसरे मामले में भी बढ़ी मुश्किलें”,

“summary”: “हजारीबाग के पूर्व उपायुक्त और निलंबित आइएएस विनय चौबे को भूमि घोटाले मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला भूमि आवंटन, प्लॉटिंग और ट्रांसफर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस बीच, उनके कार्यकाल में जमीन के मूल्यांकन में हेरफेर के एक अन्य मामले की जांच भी तेज हो गई है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।”,

“content”: “हजारीबाग के बहुचर्चित भूमि घोटाले में फंसे पूर्व उपायुक्त व निलंबित आइएएस विनय चौबे की जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सह विशेष न्यायालय (निगरानी) में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया। इससे पूर्व सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।nnबचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जहां जमानत के लिए जिरह की, वहीं अभियोजन पक्ष ने पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जमानत का कड़ा विरोध किया। यह मामला निगरानी वाद संख्या 11/25 से संबंधित है। सूत्रों के अनुसार, हजारीबाग में अपनी पदस्थापना के दौरान विनय चौबे पर भूमि आवंटन, प्लॉटिंग और ट्रांसफर में गंभीर अनियमितताएं बरतने तथा राजस्व विभागीय अनुमोदन प्रक्रिया में धोखाधड़ी के आरोप हैं। निगरानी विभाग ने इन आरोपों के आधार पर ही उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण फाइलों, नोटशीटों और स्वीकृति आदेशों पर उनसे सवाल-जवाब किए गए थे।nn14 नवंबर को दायर की गई जमानत अर्जी पर प्रारंभिक सुनवाई 17 नवंबर को हुई थी, जिसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष से केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। केस डायरी की गहन समीक्षा और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है, ऐसे में जमानत देना उचित नहीं होगा।nnइसी बीच, विनय चौबे से जुड़ा एक और मामला भी तेजी से जांच के दायरे में आ गया है। इस प्रकरण में उन पर आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान कुछ जमीनों का मूल्यांकन जानबूझकर काफी कम दर्शाया गया, जिसके चलते सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ और इसका लाभ एक विशेष वर्ग को मिला। इस मामले की भी निगरानी टीम सक्रिय रूप से जांच कर रही है और संबंधित आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा चुके हैं।nnअधिकारियों का कहना है कि इन दोनों मामलों के आपसी जुड़ाव को देखते हुए आगे भी पूछताछ और कागजात का सत्यापन किया जाएगा। जमानत खारिज होने के बाद अब पूर्व उपायुक्त की कानूनी टीम उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प तलाश सकती है। वहीं, निगरानी विभाग भी आगामी दिनों में जांच को और अधिक गहन बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। हजारीबाग में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की जांच से किन नए तथ्यों का खुलासा होता है।”

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