तंबाकू का कहर: मुंह के कैंसर मामलों में भारत विश्व में नंबर वन, हर 6 सेकंड में हो रही 1 की मौत
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सुंदरपहाड़ी में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत छात्राओं को तंबाकू के विषैले प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि तंबाकू एक वैश्विक महामारी है जो हर साल 54 लाख लोगों की जान लेती है। विकासशील देशों में इन मौतों का 80% से अधिक हिस्सा है। भारत में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां हर साल 10 लाख से अधिक लोग तंबाकू संबंधी बीमारियों के कारण मर जाते हैं।
भारत मुंह के कैंसर के मामलों में विश्व में सबसे ऊपर है। यहां 90% केस तंबाकू के उपयोग से जुड़े हैं, और लगभग 50% कैंसर के मामले तंबाकू के कारण ही होते हैं। झारखंड राज्य में वयस्क आबादी का 50% से अधिक तंबाकू उत्पादों का उपयोग करता है, जो राष्ट्रीय औसत 35% से काफी अधिक है। यह आंकड़े देश में तंबाकू की लत की भयावहता को दर्शाते हैं।
तंबाकू का उपयोग न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डालता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, तंबाकू से भारत को सालाना 1,04,500 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। यह राशि सकल घरेलू उत्पाद का 1.16% है। अधिकारियों ने छात्राओं को सिगरेट के धुएं में मौजूद 4,000 से अधिक विषैले पदार्थों के बारे में भी बताया, जिनमें आर्सेनिक (चूहा मारक जहर), कार्बन मोनोऑक्साइड (कार एग्जॉस्ट) और निकोटीन (कीटनाशक) जैसे खतरनाक रसायन शामिल हैं।
तंबाकू के कारण हर छह सेकंड में एक मौत होती है। यदि यही रुझान जारी रहा, तो 2030 तक वार्षिक मौतों की संख्या 10 मिलियन तक पहुंच सकती है। 21वीं सदी में कुल 10 अरब मौतों का अनुमान है। यह आंकड़े तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रमों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
