भारत की पहली डिजिटल जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू, 30 लाख कर्मी करेंगे डेटा संग्रह
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत की पहली डिजिटल जनगणना के पहले चरण की समयसीमा को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। यह महत्वपूर्ण अभ्यास 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में मुख्य रूप से घरों और आवासों की सूचीकरण (हाउसलिस्टिंग ऑपरेशंस) का कार्य किया जाएगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने अनुसार 30 दिनों की अवधि में यह कार्य पूरा करेंगे।
इस बार की जनगणना में नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा। यह सुविधा घर-घर जाकर सूचीकरण शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले उपलब्ध होगी, जिससे लोग ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह डिजिटल जनगणना कोविड महामारी के कारण स्थगित हुई 2021 की जनगणना के बाद आयोजित की जा रही है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण घरों की सूचीकरण और आवास स्थिति पर केंद्रित होगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। इसके लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात रखी गई है, हालांकि कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए यह तिथि अलग होगी।
यह पहली बार होगा जब पूरी जनगणना प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी। डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप (एंड्रॉइड और आईओएस) का उपयोग किया जाएगा, और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी रखी जाएगी। इस विशाल कार्य में लगभग 30 लाख जमीनी कर्मचारी, जिनमें मुख्य रूप से सरकारी शिक्षक शामिल होंगे, अपनी सेवाएं देंगे।
कैबिनेट ने इस जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये की लागत को मंजूरी दी है। जनसंख्या गणना चरण में जाति संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा। सरकार का कहना है कि एकत्र किए गए डेटा को उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाएगा और मंत्रालयों को मशीन-पठनीय प्रारूप में उपलब्ध कराया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास होगा जो भविष्य की नीति-निर्माण और विकास योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
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