ठंड का कहर: पटना में बढ़ा लकवा और ब्रेन हेमरेज का खतरा, विशेषज्ञ चिंतित
पटना में मौसम के तेवर अचानक बदल गए हैं और इस ठंड का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से राजधानी में ब्रेन हेमरेज और लकवा (स्ट्रोक) के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) की इमरजेंसी में ऐसे मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो दिनों में ही आईजीआईएमएस में 35 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती कराए गए हैं। एम्स, पीएमसीएच और शहर के अन्य प्रमुख निजी अस्पतालों में भी ऐसे मामलों में काफी इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह और शाम की सर्द हवाएं विशेष रूप से उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं। बिना पर्याप्त गर्म कपड़ों के सुबह की सैर पर निकलना या देर शाम तक बाहर रहना, हाई बीपी के मरीजों में ब्रेन हेमरेज और लकवे का कारण बन रहा है। आईजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि अकेले सोमवार को सात नए गंभीर मरीज भर्ती किए गए, जबकि पहले से ही 20 से अधिक मरीज गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में उपचाराधीन हैं।
एम्स पटना के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख ने इस प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यूरोलॉजिकल रोगियों की संख्या बढ़ी है। अधिकांश मरीज पहले से ही उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, लेकिन तापमान में गिरावट के कारण उनका रक्तचाप अनियंत्रित हो रहा है। उन्होंने सलाह दी है कि सुबह 8 बजे से पहले और शाम 6:30 बजे के बाद घर से बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनना अनिवार्य है। बाइक सवारों को विशेष रूप से अपने कान, नाक और मुंह को स्कार्फ से ढकना चाहिए ताकि ठंडी हवा का सीधा असर नसों पर न पड़े। ठंड सीधे चेहरे की नसों को प्रभावित करके लकवा जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
एक अन्य न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे हृदय तक रक्त का प्रवाह बाधित होता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह, मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने से उन पर दबाव बढ़ता है, जिससे ब्रेन हेमरेज की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि अत्यधिक ठंड में बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें, खासकर सिर और चेहरे को ढकें, और अपने रक्तचाप की नियमित जांच कराते रहें। यदि किसी व्यक्ति में अचानक कमजोरी, बोलने में दिक्कत, चेहरे का लकवा या संतुलन खोना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
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