उत्तराखंड में ‘मौत का आतंक’: संसद में गूंजा मानव-वन्यजीव संघर्ष, सांसदों ने की विशेष कार्ययोजना की मांग
उत्तराखंड में विषम भूगोल और 71.05 प्रतिशत वन भूभाग के कारण वन्यजीवों के निरंतर बढ़ते हमलों का मुद्दा संसद में भी गूंजा। लोकसभा में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और राज्यसभा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने यह विषय प्रमुखता से उठाया। बलूनी ने वन्यजीवों के हमलों की रोकथाम के लिए त्वरित, ठोस व कारगर रणनीति लागू करने पर जोर दिया।
सांसद बलूनी ने लोकसभा में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में वन्यजीवों के हमलों के कारण आमजन का घर से बाहर निकलना, बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं का घास के लिए जंगल जाना जोखिमपूर्ण हो गया है। उन्होंने जनसुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए इस विषय पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करने की बात कही।
उधर, राज्यसभा सदस्य भट्ट ने राज्य में 25 वर्षों में वन्यजीवों के हमले में मृत व घायल व्यक्तियों के आंकड़े रखते हुए कहा कि समस्या अब बहुत गंभीर हो गई है। उन्होंने बताया कि इन वर्षों में 1264 व्यक्तियों की जान गई, जबकि 6519 घायल हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि समस्या की गंभीरता को देखते हुए इससे निबटने को विशेष कार्ययोजना बनाने के साथ ही उत्तराखंड को अधिक आर्थिक मदद मुहैया कराई जाए।
