नॉन-पैन के खेल में करोड़ों की टैक्स चोरी, UP-उत्तराखंड में बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में संपत्ति खरीद-बिक्री के सौदों में नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ है। आयकर विभाग की गोपनीय जांच में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं, जिनमें पैन कार्ड होते हुए भी जानबूझकर छिपाया गया और नॉन-पैन का लाभ उठाया गया। शुरुआती जांच के अनुसार, इस तरह करीब 5000 करोड़ रुपये की संपत्तियों की खरीद-बिक्री हुई, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
संपत्ति सौदों में अनियमितताओं का यह खेल कानपुर, आगरा, मेरठ, नोएडा और देहरादून जैसे शहरों में देखा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि करोड़ों की संपत्ति ऐसे व्यक्तियों के नाम पर रजिस्टर्ड कराई गई, जिन्होंने खुद को नॉन-पैन धारक बताया। जांच में संकेत मिले हैं कि इन व्यक्तियों के पास पहले से पैन कार्ड मौजूद थे, लेकिन रजिस्ट्री के समय उन्हें प्रस्तुत नहीं किया गया।
कानपुर और आगरा के रजिस्ट्री कार्यालयों में किए गए सर्वे से कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। एक ही व्यक्ति या समूह से जुड़े कई सौदों में एक जैसा पैटर्न मिलने पर जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। आयकर विशेषज्ञ अंकुर गोयल के अनुसार, नॉन-पैन और सालाना आय ढाई लाख रुपये से कम वालों को फॉर्म-60 का लाभ मिलना चाहिए। यदि इससे अधिक आय वालों ने इसका लाभ उठाया है, तो यह नियमों के विरुद्ध है।
जांच में फॉर्म-60 के दुरुपयोग का मामला भी उजागर हुआ है। नियमों के तहत पैन कार्ड न होने पर फॉर्म-60 भरना होता है। लेकिन करोड़ों की संपत्ति खरीदने वाले लोगों ने अपनी सालाना आय ढाई लाख रुपये से कम दर्शाकर इस प्रावधान का गलत इस्तेमाल किया। यह संगठित तरीके से टैक्स चोरी का प्रयास प्रतीत होता है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।
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