उत्तराखंड में वन्यजीवों का आतंक: 23 वर्षों में 1264 की मौत, 6519 घायल
उत्तराखंड, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है, अब मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। राज्य में वन्यजीवों के हमलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आमजन भयभीत है और जान-माल का नुकसान हो रहा है। वन विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिनके अनुसार वर्ष 2000 से अब तक वन्यजीवों के हमलों में 1264 लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है, जबकि 6519 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह आंकड़े राज्य में बढ़ती इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।
इस गंभीर स्थिति को समझते हुए, राज्य सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और पीड़ित परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में, मानव क्षति के मामलों में मुआवजा राशि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत, वन्यजीव के हमले में मृत्यु होने पर पीड़ित के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, घायलों के उपचार का पूरा खर्च भी अब सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
राज्य के लगभग हर क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता ने लोगों की नींद उड़ा दी है। पहले गुलदार (तेंदुआ) प्रमुख समस्या थे, लेकिन हाल के दिनों में भालू के हमलों में भी वृद्धि देखी गई है। इस चुनौती से निपटने के लिए, वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है और उन इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। साथ ही, आम जनता को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के उपायों के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है।
दीर्घकालिक समाधानों की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन फॉर सीटीआर (CTR) की गवर्निंग बॉडी की बैठक में भी वन्यजीव हमलों में मृत्यु पर अनुग्रह राशि बढ़ाने की सिफारिश की गई थी, जिस पर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवारों को अधिकतम सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। यह कदम न केवल पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा, बल्कि वन्यजीवों के प्रति समाज में व्याप्त भय को कम करने में भी सहायक होगा।
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