उत्तराखंड कांग्रेस में टिकटों को लेकर घमासान, चुनाव से पहले बढ़ी तकरार
उत्तराखंड कांग्रेस में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ही टिकटों को लेकर घमासान मचा हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डा हरक सिंह रावत ने हार चुके नेताओं को टिकट न देने का बयान देकर पार्टी में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि ‘फ्यूज कारतूसों’ को इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा और हर विधानसभा क्षेत्र का गहन विश्लेषण कर ही टिकट तय किए जाएंगे।
डा हरक सिंह रावत के इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। हरीश रावत ने कहा कि टिकट वितरण का अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान का होता है, और किसी एक व्यक्ति की राय को अंतिम नहीं माना जा सकता। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि कारतूस का खोखा भी दुश्मन को गिराने में महत्वपूर्ण होता है, जिसका निहितार्थ यह निकाला जा रहा है कि पुराने नेताओं का अनुभव भी पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।
दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह को सतह पर ले आई है। वर्ष 2016 में हरीश रावत सरकार के खिलाफ हुई बगावत के बाद से ही हरक सिंह रावत और हरीश रावत के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है। हरीश रावत अक्सर उस बगावत का दर्द बयां करते रहे हैं। हालांकि, दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर यह दावा करते रहे हैं कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए एकजुट हैं, लेकिन टिकट वितरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनके विपरीत तेवर पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, डा हरक सिंह रावत का ‘फ्यूज कारतूस’ वाला बयान सीधे तौर पर उन नेताओं पर निशाना साधने के लिए था, जिन्हें वे चुनाव जीतने में सक्षम नहीं मानते। वहीं, हरीश रावत की प्रतिक्रिया को पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर चलने की वकालत के रूप में देखा जा रहा है। इस खींचतान से यह स्पष्ट है कि चुनाव से काफी पहले ही कांग्रेस में टिकटों को लेकर घमासान तेज होने वाला है, जिसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ सकता है।
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