0

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण में वाराणसी अव्वल, 6 माह में 4 बार शीर्ष पर

By Nov 17, 2025

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में वाराणसी ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। दीनदयाल अंत्योदय योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत, काशी की महिलाएं घरों की दहलीज से निकलकर अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार दे रही हैं। पिछले छह महीनों में वाराणसी चार बार प्रदेश में शीर्ष स्थान पर रहा है, जबकि दो बार यह टॉप टेन में जगह बनाने में कामयाब रहा। अक्टूबर माह की हालिया रैंकिंग में भी वाराणसी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह के अनुसार, प्रदेश स्तर पर 37 विभिन्न संकेतकों के आधार पर रैंकिंग तैयार की जाती है, जिनमें वाराणसी ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इन संकेतकों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना, रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराना, आजीविका गतिविधियों से जोड़ना, उत्पादक समूहों का गठन, बैंक सखी व उद्यम सखी का चयन, समूहों को बैंक ऋण दिलाना, ग्राम संगठन प्रोफाइल तैयार करना और व्यक्तिगत आंतरिक ऋण उपलब्ध कराना शामिल हैं।

उपायुक्त (स्वत: रोजगार) पवन कुमार सिंह ने बताया कि वाराणसी में 11,879 स्वयं सहायता समूहों से 1.38 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं कृषि, पशुपालन, सब्जी और फूलों की खेती, ग्रोसरी स्टोर, बीसी सखी, विद्युत सखी, टेक होम राशन प्लांट, दोना पत्तल निर्माण, ब्यूटी पार्लर, सिलाई-कढ़ाई, सिल्क साड़ी उत्पादन, अचार-मुरब्बा बनाना, काशी प्रेरणा कैफे संचालन, जूट बैग निर्माण और ड्रोन सखी जैसी विविध आजीविकापरक गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। इन प्रयासों से वे न केवल अपनी बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं।

सरकार द्वारा महिलाओं द्वारा उत्पादित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार नवीन प्रयास किए जा रहे हैं। सरस मेला और अन्य विभागीय मेलों में भागीदारी, ऑनलाइन बाजार से जुड़ाव और काशी प्रेरणा मार्ट जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। जनपद में आजीविका मिशन और जिला प्रशासन के सहयोग से महिलाओं को बीमा सखी बनाने, सीएसआर फंड के माध्यम से आजीविका से जोड़ने, मधुमक्खी पालन, मखाना की खेती और बकरी पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

एकता संकुल समिति, विकासखंड आराजीलाइन की वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षक अंजू देवी बताती हैं कि सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को आय और सम्मान दोनों दिलाया है। समूह से जुड़कर महिलाएं एक से अधिक रोजगार कर रही हैं और अपनी पहचान बना रही हैं। जो महिलाएं पहले बैंक जाने से भी हिचकिचाती थीं, अब वे सुगमता से बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले रही हैं। विकासखंड चिरईगांव की अचार और मुरब्बा बनाने वाली महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह की अमृता देवी का कहना है कि सरकार ने महिलाओं का जीवन बदल दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में हुनर तो था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वे काम नहीं कर पाती थीं। सरकार की योजनाओं ने उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान किया है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें