ट्रंप का ‘हुआ तो हुआ’ रवैया: क्या उन्होंने खाशोगी की हत्या का बचाव किया?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ हाल ही में हुई मुलाकात में पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या को कमतर आंका है, जिससे एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। 2018 में, ट्रंप प्रशासन के तहत सीआईए ने निष्कर्ष निकाला था कि खाशोगी की हत्या का आदेश सीधे तौर पर क्राउन प्रिंस एमबीएस ने दिया था।
सात साल बाद, ट्रंप ने क्राउन प्रिंस के साथ बैठे हुए इस हत्या के प्रति अपनी बेरुखी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि ‘ऐसी चीजें होती हैं।’ ट्रंप ने खाशोगी को ‘अत्यधिक विवादास्पद’ बताते हुए उनकी आलोचना भी की, और कहा कि कई लोग उन्हें पसंद नहीं करते थे। उन्होंने क्राउन प्रिंस का बचाव करते हुए कहा कि ‘उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता था।’ यह टिप्पणी कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा की 1984 के सिख विरोधी दंगों पर की गई ‘हुआ तो हुआ’ वाली टिप्पणी की याद दिलाती है, जिसमें लगभग 500 लोग मारे गए थे।
यह घटनाक्रम तब हुआ जब एमबीएस अमेरिका दौरे पर थे, जो खाशोगी की हत्या के बाद उनकी पहली अमेरिका यात्रा थी। ट्रंप ने एक रिपोर्टर को भी फटकार लगाई जिसने क्राउन प्रिंस की मौजूदगी में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने रिपोर्टर से कहा, ‘आपको हमारे मेहमान को इस तरह के सवाल पूछकर शर्मिंदा करने की ज़रूरत नहीं है।’ खाशोगी, जो सऊदी शाही परिवार के पूर्व सदस्य थे और सरकार के कटु आलोचक बन गए थे, अक्टूबर 2018 में इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में अपनी मंगेतर से शादी करने के लिए कागजात लेने के बाद लापता हो गए थे। उनके अवशेष आज तक नहीं मिले हैं।
2021 की एक अमेरिकी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि मोहम्मद बिन सलमान ने खाशोगी की हत्या को मंजूरी दी थी। हालांकि, अमेरिका ने कई सऊदी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन भावी सऊदी राजा को निशाना नहीं बनाया। मंगलवार को, क्राउन प्रिंस, ट्रंप के साथ बैठे हुए, शांत रहे और कहा कि सऊदी अरब ने हत्या की जांच के लिए ‘सही कदम’ उठाए थे, जिसे उन्होंने ‘दर्दनाक’ बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह रवैया अमेरिका-सऊदी संबंधों में बदलाव का संकेत है, और यह खाशोगी की हत्या से जुड़े मानवाधिकारों के मुद्दों को दरकिनार करता है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप का यह व्यवहार उनके पुराने बयानों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के विपरीत है, जिससे कई लोगों में निराशा है। यह घटनाक्रम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
