0

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति: जयशंकर ने एससीओ बैठक में किया स्पष्ट

By Nov 18, 2025

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी अडिग नीति को एक बार फिर स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदस्य देशों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार को किसी भी सूरत में छोड़ने वाला नहीं है और इस दिशा में उठाए गए कदमों को आगे भी जारी रखेगा। उन्होंने एससीओ से भी आतंकवाद के प्रति ‘जीरो-टॉलरेंस’ यानी शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने का पुरजोर आग्रह किया।

रूस की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में, जयशंकर ने संगठन में सुधार और उसे आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत एससीओ में सुधार-केंद्रित एजेंडे का समर्थन करता है। विदेश मंत्री ने संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एससीओ द्वारा उठाए जा रहे कदमों का स्वागत किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने संगठन की आधिकारिक भाषाओं में अंग्रेजी को शामिल करने की दिशा में प्राथमिकता से कदम उठाने की अपील की, जिससे संचार और सहयोग को बढ़ावा मिल सके। वर्तमान में एससीओ की आधिकारिक भाषाएं चीनी और रूसी हैं।

अपने संबोधन के अंत में, जयशंकर ने आतंकवाद के मूल खतरों को रेखांकित करते हुए कहा कि एससीओ की स्थापना ही आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी बुराइयों से निपटने के लिए हुई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति दुनिया को एक समान रुख अपनाना चाहिए। इसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसकी अनदेखी की जा सकती है और न ही इस पर पर्दा डाला जा सकता है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसा कि भारत ने हमेशा प्रदर्शित किया है, अपने लोगों की रक्षा करना हमारा अधिकार है और हम इसका प्रयोग आगे भी करेंगे।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब आतंकवाद का मुद्दा एससीओ के सदस्य देशों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। जयशंकर का यह बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री की उपस्थिति में आतंकवाद का मुद्दा मुखरता से उठाया। इससे पहले भी भारत के प्रधानमंत्री ने एससीओ शिखर सम्मेलनों में आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने मास्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इस मुलाकात के दौरान, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा के एजेंडे पर भी चर्चा की। यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें