आत्मसमर्पित माओवादियों ने खोला कैफे, सीएम साय ने परोसी कॉफी
बस्तर में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व पहल के तहत, आत्मसमर्पित माओवादियों ने ‘पंडुम कैफे’ की शुरुआत की है। इस कैफे का उद्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे बस्तर क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक बताया। यह कदम सरकार की पुनर्वास योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व माओवादियों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।
पुलिस लाइन के शांत प्रांगण में सोमवार की सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो बस्तर के लिए दशकों बाद सुकून और आशा लेकर आया। वे हाथ, जो कभी जंगलों में हथियार थामे रहते थे, आज आत्मविश्वास और गर्मजोशी से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को कॉफी के कप परोस रहे थे। नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर और बस्तर की आशमती जैसी पूर्व माओवादियों ने जब मुख्यमंत्री को कॉफी दी, तो यह केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह उन अनगिनत संघर्षों और रातों के बाद आए एक नए सवेरे का प्रतीक था।
मुख्यमंत्री साय ने कैफे का शुभारंभ करते हुए कहा, ‘पंडुम कैफे बस्तर में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। जिन्होंने संघर्ष की राह छोड़ी है, वे अब समाज में सेवा और सम्मान के रास्ते बना रहे हैं।’ उन्होंने इस पहल की सराहना की और पूर्व माओवादियों के समाज में पुन: एकीकरण के प्रयासों को बल दिया।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में लगभग दो हजार माओवादियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। सरकार इन आत्मसमर्पित व्यक्तियों के लिए सम्मानजनक जीवन यापन सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है, जिसमें कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना शामिल है। ‘पंडुम कैफे’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल पूर्व माओवादियों को रोजगार दे रहा है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देने की क्षमता रखता है। यह पहल बस्तर में शांति स्थापना और विकास की नई कहानी लिख रही है, जहाँ ‘लाल सलाम’ की जगह अब ‘नमस्ते’ और सेवा भाव ने ले ली है।
