आइआइटी कानपुर का अनोखा आविष्कार: छत पर लगेगी विंड टरबाइन, धीमी हवा से भी बनेगी बिजली
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे अभिनव विंड टरबाइन का मॉडल तैयार किया है जो बड़े शहरों की ऊंची इमारतों के बीच उत्पन्न होने वाले हवा के गलियारों का उपयोग करके बिजली पैदा कर सकता है। यह विशेष रूप से डिजाइन की गई ऊर्ध्व धुरी वाली विंड टरबाइन (वीएडब्ल्यूटी) हवा की अत्यंत धीमी गति, लगभग 3.5 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार पर भी बिजली उत्पन्न करने की क्षमता रखती है। इसके छोटे आकार के कारण इसे घरों की छतों पर भी आसानी से स्थापित किया जा सकता है।nnइस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व आइआइटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और सस्टेनबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर देबोपम दास ने किया, जिसमें शिवम श्रीभाटे और सिद्धार्थ नामक शोधार्थियों ने सहयोग किया। यह नया डिज़ाइन वायु ऊर्जा के पारंपरिक उपयोग के तरीके को बदलने की क्षमता रखता है। जहां वर्तमान में विंड टरबाइन का उपयोग बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए होता है, वहीं इस मॉडल से घरों, कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों के उन हिस्सों में भी वायु ऊर्जा का दोहन संभव होगा जहां पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।nnशोधकर्ताओं के अनुसार, इस टरबाइन की सबसे बड़ी खूबी इसका अनूठा ‘पिच-कंट्रोल मैकेनिज्म’ है। यह तंत्र टरबाइन ब्लेड की उपयोगिता को अधिकतम करता है। ब्लेड स्वचालित रूप से हवा की दिशा और गति के अनुसार खुद को समायोजित करते हैं, जिससे हवा की शक्ति का प्रभावी ढंग से उपयोग हो पाता है। परीक्षणों में पाया गया है कि स्थिर ब्लेड वाले पारंपरिक टरबाइनों की तुलना में इस नवाचार से टरबाइन की कार्यक्षमता में 42 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है।nnछोटे और प्रयोग में आसान ढांचे के कारण, इस वीएडब्ल्यूटी को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इमारतों की छतों पर लगाया जा सकता है। इसे सौर ऊर्जा प्रणालियों के साथ एकीकृत करके दिन-रात बिजली उत्पादन संभव है। यह उन स्थानों जैसे नदी किनारे या शहरी कॉलोनियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहां हवा की दिशा और गति में तेजी से बदलाव होता है। इस तकनीक से बिना किसी प्रदूषण उत्सर्जन के बिजली प्राप्त की जा सकती है। एक छोटे मॉडल को यदि शहरी घरों की छतों पर लगाया जाए, तो 12 मीटर प्रति सेकंड की हवा चलने पर यह प्रतिदिन एक यूनिट और महीने में लगभग 60 यूनिट बिजली का उत्पादन कर सकता है। इस उल्लेखनीय आविष्कार को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है।”
मिल चुका है।
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