आईआईटी बॉम्बे के मेस का वीडियो वायरल, हरियाणा की छात्रा ने दिखाई देश की खाद्य संस्कृति
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के छात्र जीवन का एक अनूठा पहलू इन दिनों इंटरनेट पर धूम मचा रहा है। संस्थान की एक छात्रा गरिमा ने अपने कैंपस मेस के भोजन अनुभव को दर्शाने वाला एक छोटा सा वीडियो बनाया है, जो अब वायरल हो गया है। इस वीडियो में, गरिमा ने विस्तार से बताया है कि कैसे भारत के एक शीर्ष शैक्षणिक संस्थान में छात्रों को भोजन परोसा जाता है।nnवीडियो की शुरुआत में गरिमा अपना परिचय देते हुए कहती हैं, “मैं हरियाणा से हूँ और मैंने पहले कभी अन्य राज्यों की खाद्य संस्कृति को इतने करीब से नहीं देखा था, लेकिन IIT बॉम्बे मुझे हर चीज़ से परिचित कराने में मदद कर रहा है।” यह कथन न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव को दर्शाता है, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए IIT बॉम्बे के समावेशी माहौल को भी उजागर करता है।nnगरिमा बांगर द्वारा बनाया गया यह छोटा वीडियो, जो मूल रूप से 2024 में पोस्ट किया गया था, अब फिर से वायरल हो गया है। इसे 12 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है, 4 लाख से अधिक लाइक्स मिले हैं और लगभग 1,300 टिप्पणियां प्राप्त हुई हैं। यह आंकड़ा वीडियो की व्यापक अपील और दर्शकों के बीच इसकी प्रासंगिकता को दर्शाता है।nnअपने यूट्यूब चैनल @garimabangar के माध्यम से, गरिमा ने IIT बॉम्बे के मेस का एक संक्षिप्त दौरा कराया है और वहां परोसे जाने वाले भोजन के बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे IIT बॉम्बे में विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका मिलता है, खासकर त्योहारों के दौरान। गरिमा के अनुसार, “हर त्योहार हमारी प्लेट में मेस में दिखाई देता है।”nnउन्होंने एक विशेष उदाहरण देते हुए बताया कि पोंगल के दौरान, उनके हॉस्टल ने केले के पत्तों पर भोजन परोसा था। छात्र जमीन पर बैठकर, जूते उतारकर पारंपरिक तरीके से भोजन कर रहे थे। गरिमा ने इसे एक अलग और यादगार अनुभव बताया, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने पहली बार दक्षिण भारतीय त्योहार का पारंपरिक भोजन चखा था।nnवीडियो में मेस में स्वच्छता के मानकों को भी प्रदर्शित किया गया है। डाइनिंग एरिया साफ-सुथरा और व्यवस्थित नजर आता है, जो छात्रों के लिए एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करता है। यह वीडियो न केवल IIT बॉम्बे के मेस की झलक दिखाता है, बल्कि भारत की विविध खाद्य संस्कृति के प्रति छात्रों की जिज्ञासा और उसे अपनाने की भावना को भी प्रेरित करता है।”
प्रोत्साहित करता है।
