ताइक्वांडो का बढ़ता क्रेज: फिरोजाबाद में छात्रों का आत्मविश्वास और फिटनेस बढ़ा रहा यह खेल
आज के डिजिटल युग में, जहाँ बच्चे मोबाइल और इनडोर गेम्स में अधिक समय बिताते हैं, वहीं फिरोजाबाद में ताइक्वांडो जैसे खेल के प्रति क्रेज धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अभिभावक भी अपने बच्चों को इस मार्शल आर्ट को सीखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, क्योंकि यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास और शारीरिक विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।nnताइक्वांडो सीखने वाले छात्र-छात्राओं का कहना है कि इस खेल से उनके शरीर में ताजगी बनी रहती है और वे शारीरिक रूप से फिट महसूस करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ताइक्वांडो ने उनके आत्मविश्वास में इजाफा किया है, जिससे वे अपने दैनिक कार्यों को बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं। कई छात्र-छात्राएं तो ताइक्वांडो में ही अपना करियर बनाने का सपना देख रहे हैं और ओलंपिक खेल होने के नाते इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।nnवहीं, कुछ का लक्ष्य करियर से अलग है; वे शरीर को फिट रखने और आत्मरक्षा में सक्षम होने के लिए ताइक्वांडो सीख रहे हैं। इससे उनकी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव आया है। छात्राओं के बीच भी ताइक्वांडो को लेकर काफी संजीदगी देखी जा रही है। अधिकांश छात्राओं का मानना है कि ताइक्वांडो ने न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है, बल्कि उन्हें अपनी सुरक्षा करने और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करने में भी सक्षम बनाया है। उनका कहना है कि हर लड़की को यह खेल सीखना चाहिए।nnविशेषज्ञों के अनुसार, ताइक्वांडो निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करता है। खेल के दौरान विरोधी की चाल को देखकर तुरंत बचाव की रणनीति सोचने से खिलाड़ी मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं। यह क्षमता जीवन और करियर में भी अत्यंत सहायक सिद्ध होती है। इसके अलावा, यह खेल शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखता है और आत्मरक्षा के कौशल को बढ़ाता है, जिससे छात्र-छात्राएं हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।nnछात्रों का मानना है कि स्कूलों में ताइक्वांडो कैंप लगाए जाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक बच्चे इस विधा से जुड़ सकें और सशक्त बन सकें। सरकार से भी इस दिशा में पहल करने की अपील की गई है।nnऐशलेषा पोरवाल बताती हैं, “ताइक्वांडो से शरीर फिट रहता है और हम अपनी सुरक्षा भी कर सकते हैं। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और हम आगे बढ़कर सफलता हासिल करना चाहते हैं।”nnदेव का कहना है, “ताइक्वांडो सीखने के बाद शरीर में फुर्ती आई है और आत्मविश्वास बढ़ा है। बच्चों को यह जरूर सीखना चाहिए।”nnमिष्ठी अग्रवाल ने कहा, “ताइक्वांडो से हमारी क्षमताओं का विकास होता है और बेटियों को रक्षा करने में मदद मिलती है। हमारा लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।”nnविंशी के अनुसार, “ताइक्वांडो से छात्राओं में सुरक्षा का भाव और आत्मविश्वास बढ़ता है। हम इसी क्षेत्र में आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाना चाहते हैं।”nnनित्या पोरवाल ने कहा, “ताइक्वांडो से स्किल्स का विकास होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। हम इसमें सफलता के लिए मेहनत कर रहे हैं।”nnपाखी ने साझा किया, “हमने ताइक्वांडो में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर तक खेलने का निश्चय किया है। छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए इसे जरूर सीखना चाहिए।”
