ताजमहल से करोड़ों की कमाई, रखरखाव में ASI का पिछड़ना चिंताजनक
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा 19 से 25 नवंबर तक मनाए जा रहे विश्व धरोहर सप्ताह के बीच, दुनिया के अजूबों में शुमार ताजमहल के संरक्षण की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। यह सप्ताह हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि जिस ताजमहल से एएसआई को भारी राजस्व प्राप्त होता है, उसके रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में ताजमहल से टिकटों की बिक्री और फिल्मों की शूटिंग फीस से एएसआई को लगभग 99.54 करोड़ रुपये की आय हुई थी। यह एक बड़ी राशि है, जो इस विश्व प्रसिद्ध स्मारक की भव्यता को बनाए रखने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इस आय का एक बहुत छोटा हिस्सा, मात्र 3.17 करोड़ रुपये, इसके संरक्षण और रखरखाव पर व्यय किया गया। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आय और व्यय के बीच एक बड़ा अंतर है, जो स्मारक के भविष्य के लिए चिंताजनक है।
ताजमहल के मुख्य मकबरे की दीवारों पर लगे संगमरमर के पत्थर कई जगहों से चटक रहे हैं। विशेष रूप से, पच्चीकारी के पत्थर, जो इसकी सुंदरता को चार चांद लगाते हैं, कई स्थानों से गायब हो गए हैं या उन्हें भद्दे तरीके से दोबारा लगाया गया है। रॉयल गेट के अंदरूनी हिस्सों में छोटे पत्थर के स्तंभों का प्लास्टर भी उखड़ रहा है। यह स्थिति न केवल पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित करती है, बल्कि स्मारक की ऐतिहासिक अखंडता पर भी सवाल उठाती है।
पर्यटन के लिहाज से ताजमहल देश और दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। वर्ष 2024 में ही, 63.91 लाख भारतीय और 7.06 लाख विदेशी पर्यटक इस अद्भुत स्मारक को देखने आए थे। इतने बड़े पैमाने पर पर्यटकों के आगमन से होने वाली आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसके संरक्षण पर खर्च होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी सुंदरता का अनुभव कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि पत्थरों में चटकन का एक कारण लोहे के क्लैंप का फूलना हो सकता है, जो समय के साथ संगमरमर को नुकसान पहुंचाता है। पच्चीकारी के पत्थरों के गायब होने और बेतरतीब ढंग से लगाए जाने से स्मारक की कलात्मकता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि पच्चीकारी के संरक्षण का प्रस्ताव विचाराधीन है और गायब हुए पत्थरों को लगाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, पत्थरों में आई चटकन की जांच भी की जाएगी। हालांकि, इन दावों की जमीनी हकीकत और क्रियान्वयन पर बारीकी से नजर रखने की आवश्यकता है, ताकि विश्व धरोहर सप्ताह केवल एक औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि ताजमहल जैसे अमूल्य स्मारकों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
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