लखनऊ में ‘घर की मुर्गी’ नाटक का सफल मंचन, रिश्तों में सम्मान की सीख
लखनऊ के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बिम्ब सांस्कृतिक समिति द्वारा ‘घर की मुर्गी’ नामक नाटक का सफल मंचन हुआ। यह नाटक इस पुरानी कहावत को चरितार्थ करता है कि हमें अपने पास जो है उसकी कद्र करनी चाहिए। राम किशोर नाग द्वारा लिखित और सरिता कपूर के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण सीख भी दी।
नाटक की कहानी व्यवसायी रामजी और उनकी पत्नी सरिता के इर्द-गिर्द घूमती है। रामजी पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित हैं और अपनी पत्नी सरिता, जो भारतीय परंपराओं का पालन करती है, को अक्सर ताने मारते हैं। जब रामजी को ऑफिस में एक नई सेक्रेटरी की आवश्यकता होती है, तो वे आधुनिकतावादी मोना को नौकरी पर रख लेते हैं। उन्हें मोना के हाथ का खाना स्वादिष्ट लगता है, जबकि घर पर सरिता के हाथ का खाना बेस्वाद लगता है। रामजी मोना के सामने सरिता को पिछड़ा हुआ बताते हैं।
जब सरिता रामजी की सेक्रेटरी से मिलने ऑफिस आने की बात कहती है, तो रामजी डर जाते हैं और मोना को छुट्टी पर भेज देते हैं। बाद में, जब सरिता मायके जाती है, तो रामजी मोना को घर बुलाते हैं। तभी उन्हें पता चलता है कि मोना कोई और नहीं बल्कि उनकी पत्नी सरिता ही है, जिसने यह सब रामजी को सबक सिखाने के लिए किया था।
यह सरिता कपूर का बतौर निर्देशक पहला प्रयास था। उन्होंने दो विपरीत किरदारों को एक ही कलाकार से सफलतापूर्वक निभवाया। नाटक में उज्ज्वल सिंह ने रामजी की भूमिका निभाई, जबकि शालू तिवारी ने सरिता और मोना का दोहरा किरदार निभाया। आनन्द तिवारी ने प्रकाश और खेलावन की भूमिका निभाई, और प्रियांशी मौर्या ने किटी का किरदार निभाया।
